मुख्यमंत्री, झारखण्ड, श्री अर्जुन मुण्डा ने इस मौके पर कहा कि आज विकास ही झारखण्ड राज्य की प्रथमतः एवं अन्ततः प्राथमिकता है एवं समेकित विकास के अलावे सरकार का कोई एजेन्डा नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य के आर्थिक विषयों पर अघ्ययन हेतु प्रो० देवराय की अध्यक्षता में गठित कमिटि शीघ्र अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि इस बाबत सरकार प्रयासरत है कि झारखण्ड राज्य के विकास की दर कम से कम 10 प्रतिशत हो एवं राज्य के मानव संसाधन की दक्षता गुणवत्तायुक्त एवं उत्पादनपरक हो।
उन्होंने विमर्श के दौरान चिंता जाहिर किया कि अनियमित वर्षापात और सुखाड़ से झारखण्ड राज्य के लोगों को जूझना पड़ रहा है लेकिन झारखण्डवासी नई चुनी हुई पंचायतों को लेकर खासे उत्साहित है, जहाँ उन्हें विकास की नई किरणों की संभावनाएँ दिख रही है।
उन्होंने सूबे कि विकास हेतु एक साथ ही दीर्घकालिक एवं छोटी अवधि के कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि पारदर्शी व्यवस्था के तहत निविदाएँ आॅनलाईन जारी की जाएँगी। ग्रामीण स्तर तक विकास के आयामों को दुरूस्त करने के साथ-साथ सूचना तकनीक के प्रसार एवं आम लोगों तक उसकी उपलब्धता के प्रयास किए जा रहे है। जन वितरण प्रणाली को गाँव-टोलांें के स्तर तक सुदृढ़ करने का बीड़ा सरकार ने उठाया है। सरकार का यह प्रयास है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लक्षित समूहों तक सुगमतापूर्वक सुलभ हो। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों एवं शहरी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़कों के निर्माण, सबके लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, सिंचाई के साधनों का समुचित विकास एवं कुशल प्रबंधन, सबों को सुरक्षा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य को स्पष्ट प्राथमिकताओं की श्रेणी में रखा है।
इस विमर्श सत्र के दौरान झारखण्ड के उप मुख्यमंत्री श्री सुदेश कुमार महतो एवं श्री हेमंत सोरेन ने भी सबों से झारखण्ड के विकास में सहयोग देने की अपील की।
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