राँची, 22 जुलाई, 2011-सूबे की बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार “धन श्री योजना” लाएगी। मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने इस बाबत शीध्र मंत्रिपरिषद् के समक्ष प्रस्ताव लाए जायें का निदेश दिया है। बेेटी के जन्म के संबंध में फैली भ्रांतियों को दूर करने, बालिका शिक्षा में सुधार, बाल विवाह प्रथा की समाप्ति एवं कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक विसंगतिओं को दूर करने के उद्देश्य से संचालित होने वाली इस योजना से गरीब परिवारों की बेटियाँ आगे की शिक्षा और जीवन की जरूरतों का खर्च स्वयं उठा सकेगी।
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने आगामी राज्य स्थापना दिवस (15 नवंबर,2011) से इस योजना की शुरूआत का निदेश देते हुए कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे परिवारों की नवजात बालिका के जन्म से लेकर पाँच साल की उम्र तक हरेक साल बालिका के खाते में सरकार 6000रू जमा करेगी। इसके लिए यह शर्त होगी की बच्ची का जन्म संस्थागत प्रसव से हुआ हो।
इस योजना में सम्मिलित की जाने वालि बी॰पी॰एल परिवारों की लगभग 1,80,740 बालिकाओं को कक्षा 6 में प्रवेश करने पर क्रमशः 2000रू, कक्षा 9 में जाने पर, 4000रू, 11वी में जाने पर 7500रू का एकमुश्त भुकतान उनके बैंक खाते के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावे 11वीं एवं 12वी कक्षा में इसी निधि से प्रतिमाह 200रू की छात्रवृति मिलेगी। बालिका की आयु 21 वर्ष होने तथ 12वीं की परीक्षा देने पर एकमुश्त 1,08,600रू का भुगतान किया जाएगा बशर्ते बालिका का विवाह 18 साल की आयु पूरी करने के बाद हुआ हो।
“धन श्री योजना में गरीबी रेखा के अन्तर्गत वैसे परिवारों की बेटियों को शामिल किया जाना है जिनके माता-पिता ने दो बच्चों के जन्म के बाद परिवार नियोजन अपनाया हो। इस योजना मे 15.11.2010 के बाद जन्मी बेटियों अनाथ बालिकाओं, गोद ली गई बेटियों को शामिल किया जाना है। परंतु बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने पर योजना का लाभ नही मिल सकेगा। पोस्ट आॅफिस के माध्यम से संचालित होने वाली इस योजना पर प्रथम वर्ष राज्य सरकार का अनुमानित 108 करोड़ रू का व्ययभार होगा।इस योजना के अन्तर्गत माता-पिता दोनो की मृत्यु के मामले में परिवार नियोजन की शर्त नहीं होगी। अनाथ/गोद ली गई बालिका को प्रथम बालिका माना जाएगा एवं जुड़वा बच्चियों के मामले में दोंनों बेटियों को लाभ देय होगा।
इस योजना के लिए आँगनबाडि़कर्मी अपने क्षेत्राधीन बी॰पी॰एल परिवार की महिला की प्रसूति का निबंधन कराएगी एवं बेटी के जन्म होने पर अहर्ता प्राप्त मामलों के लिए आवेदन भरवाएँगी। योजना के पारदर्शी कार्यान्वयन हेतु डाक विभाग एवं राज्य सरकार संयुक्त रूप से वेबसाईट पर सभी सूचनाएँ देंगी।
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने आगामी राज्य स्थापना दिवस (15 नवंबर,2011) से इस योजना की शुरूआत का निदेश देते हुए कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे परिवारों की नवजात बालिका के जन्म से लेकर पाँच साल की उम्र तक हरेक साल बालिका के खाते में सरकार 6000रू जमा करेगी। इसके लिए यह शर्त होगी की बच्ची का जन्म संस्थागत प्रसव से हुआ हो।
इस योजना में सम्मिलित की जाने वालि बी॰पी॰एल परिवारों की लगभग 1,80,740 बालिकाओं को कक्षा 6 में प्रवेश करने पर क्रमशः 2000रू, कक्षा 9 में जाने पर, 4000रू, 11वी में जाने पर 7500रू का एकमुश्त भुकतान उनके बैंक खाते के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावे 11वीं एवं 12वी कक्षा में इसी निधि से प्रतिमाह 200रू की छात्रवृति मिलेगी। बालिका की आयु 21 वर्ष होने तथ 12वीं की परीक्षा देने पर एकमुश्त 1,08,600रू का भुगतान किया जाएगा बशर्ते बालिका का विवाह 18 साल की आयु पूरी करने के बाद हुआ हो।
“धन श्री योजना में गरीबी रेखा के अन्तर्गत वैसे परिवारों की बेटियों को शामिल किया जाना है जिनके माता-पिता ने दो बच्चों के जन्म के बाद परिवार नियोजन अपनाया हो। इस योजना मे 15.11.2010 के बाद जन्मी बेटियों अनाथ बालिकाओं, गोद ली गई बेटियों को शामिल किया जाना है। परंतु बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने पर योजना का लाभ नही मिल सकेगा। पोस्ट आॅफिस के माध्यम से संचालित होने वाली इस योजना पर प्रथम वर्ष राज्य सरकार का अनुमानित 108 करोड़ रू का व्ययभार होगा।इस योजना के अन्तर्गत माता-पिता दोनो की मृत्यु के मामले में परिवार नियोजन की शर्त नहीं होगी। अनाथ/गोद ली गई बालिका को प्रथम बालिका माना जाएगा एवं जुड़वा बच्चियों के मामले में दोंनों बेटियों को लाभ देय होगा।
इस योजना के लिए आँगनबाडि़कर्मी अपने क्षेत्राधीन बी॰पी॰एल परिवार की महिला की प्रसूति का निबंधन कराएगी एवं बेटी के जन्म होने पर अहर्ता प्राप्त मामलों के लिए आवेदन भरवाएँगी। योजना के पारदर्शी कार्यान्वयन हेतु डाक विभाग एवं राज्य सरकार संयुक्त रूप से वेबसाईट पर सभी सूचनाएँ देंगी।
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