इसके लिए 18 से 25 आयु वर्ष के कम-से-कम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण युवा पात्र होंगे एवं एक सत्र के लिए 25 से 30 युवाओं का चयन किया जाएगा। प्रशिक्षण व्यय सरकार वहन करेगी। कुशल प्रशिक्षुओं को 1500 रू॰ से 2000 रू॰ तक स्टाइपेन्ड भी दिया जाएगा। सत्र के अन्त में परीक्षा आयोजित की जाएगी एवं सफल प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र दिए जाने के अलावा सरकार का पर्यटन विभाग सफल अभ्यर्थियों को पर्यटन उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार दिलाने हेतु विशेष रोजगार मेला आयोजित करेगा। पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना पर प्रति प्रशिाक्षु सरकार को लगभग नौ हजार से बारह हजार रूपये का व्यय होगा। इसमें स्टाइपेन्ड, यूनिफार्म, लंच, कोर्स मैटेरियल सहित प्रशिक्षण का व्यय शामिल है।
Thursday, July 28, 2011
हुनर से मिलेगा रोजगार
इसके लिए 18 से 25 आयु वर्ष के कम-से-कम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण युवा पात्र होंगे एवं एक सत्र के लिए 25 से 30 युवाओं का चयन किया जाएगा। प्रशिक्षण व्यय सरकार वहन करेगी। कुशल प्रशिक्षुओं को 1500 रू॰ से 2000 रू॰ तक स्टाइपेन्ड भी दिया जाएगा। सत्र के अन्त में परीक्षा आयोजित की जाएगी एवं सफल प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र दिए जाने के अलावा सरकार का पर्यटन विभाग सफल अभ्यर्थियों को पर्यटन उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार दिलाने हेतु विशेष रोजगार मेला आयोजित करेगा। पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना पर प्रति प्रशिाक्षु सरकार को लगभग नौ हजार से बारह हजार रूपये का व्यय होगा। इसमें स्टाइपेन्ड, यूनिफार्म, लंच, कोर्स मैटेरियल सहित प्रशिक्षण का व्यय शामिल है।
दुमका-रामपुरहाट पथ का शिलान्यास
दुमका-रामपुरहाट मुख्यपथ पर अवस्थित शिकारीपाड़ा विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत बरमसिया गांव में आयोजित शिलान्यास समारोह में राज्य के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, कृषि मंत्री श्री सत्यानन्द झा बाटुल, शिकारीपाड़ा विधायक श्री नलिन सोरेन सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सड़क, बिजली, सिंचाई, कृषि आदि क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने के लिए राज्य के बजट में अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि आवागमन की बेहतर सुविधा और व्यापार व रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संताल परगना सहित राज्य के सभी प्रमंडलों की जर्जर पथों को दुरूस्त करने का कार्य प्रारम्भ किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार को डुमरी-देवघर-दुमका-रामपुरहाट को नेशनल हाईवे में शामिल कर इस पथ के जीर्णोद्धार करने का आग्रह किया है लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा झारखण्ड सरकार के इस प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा अपने संसाधनांे से जर्जर पथों का जीर्णोद्धार के साथ गोविन्दपुर साहेबगंज पथ का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। गंगा में पुल निर्माण कार्य की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गई है।
माननीय मुख्यमंत्री द्वारा ग्राम्य अभियंत्रण संगठन (आर.ई.ओ.) के नियंत्राधीन बरमसिया - रघुनाथपुर पथ को पथ निर्माण विभाग के अधीन कर उसके शीघ्र जीर्णोद्धार की दिशा में कार्रवाई प्रारम्भ करने का निदेश दिया गया। उन्होंने आम जनता से पथों के चैड़ीकरण और निर्माण कार्य में सरकार को सहयोग देने की अपील की। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत अब दस हजार रूपये की जगह पर पन्द्रह हजार रूपये उपलब्ध कराया जाएगा। गरीब की बेटी भी समाज में पढ़ लिखकर आगे बढ़े एवं आत्मसम्मान के साथ जी सके इके लिए सरकार उनके जन्म के समय से लगातार छः वर्षों तक 5000/-प्रति वर्ष बैंक में जमा करने की योजना पर कार्य कर रही है। सरकार निश्चित समय सीमा में जनता के कार्यों के निष्पादन की योजना भी बना रही है। इसके अन्तर्गत निहित समय सीमा में कार्य नहीं होने पर संबंधित अधिकारी आर्थिक दंड के भागी बनेंगे।
माननीय मुख्यमंत्री श्री मुण्डा ने कहा कि कृषि के विकास के लिए राज्य सरकार सिंचाई की बेहतर सुविधा मुहैया कराने के प्रति कृतसंकल्प है। उन्हांेने कृषि विभाग को खरीफ फसल के साथ रबी फसल के उत्पादन में भी वृद्धि लाने की दिशा में कार्य करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व के वर्षों में 2009 में सुखाड़ प्रभावित क्षेत्रों के संबंध में फर्जी रिपोर्ट दिये जाने से किसानों को फसल बीमा योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। इसलिए सरकार द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारियों को कृषि से संबंधित सही रिपोर्ट देने की चेतावनी दी गयी है।
श्री मुण्डा ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजना की चर्चा करते हुए कहा कि कम क्षमता वाला ट्रांसफर्मर लगाये जाने से गांवों में बिजली पहुंचाने का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। इसलिए राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार से उच्च क्षमता का ट्रांसफर्मर गांवों में लगाने का आग्रह किया हैं।
श्री मुण्डा ने इसी क्रम में कहा कि राज्य सरकार राज्य समन्वय समिति के अध्यक्ष सांसद शिबू सोरेन के मार्गदर्शन में राज्य की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप सभी क्षेत्रों में त्वरित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
समारोह में समन्वय समिति के अध्यक्ष सांसद माननीय शिबू सोरेन ने राज्य सरकार से राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए तेजी से कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने जनता से अपने अधिकार और कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया और कहा कि राज्य सरकार को सभी क्षेत्रांे के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना चाहिए। सिर्फ रांची ही नहीं संतालपरगना सहित सभी क्षेत्रों में समान रूप से जनता की समस्याओं पर सार्वजनिक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य करना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि संताल परगना आदर्श प्रमंडल बनेगा। इस दिशा में पहल शुरू कर दी गयी है। जनसभा को माननीय कषि मंत्री श्री सत्यानन्द झा बाटुल, माननीय विधायक श्री नलिन सोरेन और पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री एन.एन. सिन्हा ने भी संबोधित किया। समारोह में प्रमंडलीय आयुक्त श्री संतोष कुमार, उपायुक्त श्री प्रशांत कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक श्री विनय कुमार पाण्डेय पुलिस अधीक्षक श्री हेमंत टोप्पो सहित प्रमंडल व जिला के पदाधिकारीगण भी मौजूद थे।
Wednesday, July 27, 2011
फेसबुक पर उपलब्ध है मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा
बताया गया है कि मुख्यमंत्री सचिवालय में अभी एक ऐसा सेंटर विकसित किया जा रहा है, जहां राज्य भर से कोई भी व्यक्ति सीधे फोन पर अपनी समस्या या शिकायत दर्ज करा सकेगा और यह रिकार्ड हो जाएगा। बाद में मुख्यमंत्री खुद इन मामलों पर सीधी कार्रवाई करेंगे। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री और झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी भी सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से आमजनों से जुटे हैं। राज्य के जो नेता फेसबुक पर उपलब्ध है, उनमें सबसे अधिक फालोवर बाबूलाल मरांडी के है, जबकि उनके ठीक पीछे भाजपा नेता और पूर्व विधायक सरयू राय हैं। सरयू राय के फेसबुक से 4535 लोग जुड़े हैं। जबकि भाजपा नेता अजय मारू के साथ फेसबुक में 1698 लोग जुड़े हैं।
Tuesday, July 26, 2011
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की पहल
सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, सरकार एवं राज्य की जनता के बीच सेतु का कार्य करता है। यह सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों के संबंध में सूचना उपलब्ध कराकर जनजागरूकता उत्पन्न करता है साथ ही कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन एवं पुनर्गठन हेतु फीडबैक प्राप्त करता है।
विभाग की प्रमुख उपलब्धियां
- विज्ञापनों एवं प्रेस विज्ञप्तियों को आनलाइन जारी किया जा रहा है।
- सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का अधुनातन सुविधाओं से युक्त सूचना भवन अब कार्यरत है। उक्त सूचना भवन के अढ़ाई तल्लों का इस्तेमाल भारतीय प्रबंधन संस्थान, रांची के द्वारा किया जा रहा है।
- अच्छी गुणवत्ता की आधिकारिक झारखण्ड डायरी 2011, टेबुल कैलेण्डर, दीवाल कैलेण्डर एवं अपडेट की गई दूरभाष निर्देशिका का प्रकाशन एवं वितरण।
- इस वित्तीय वर्ष में विभाग के द्वारा सूचना भवन में एक सचिवालय पुस्तकालय की स्थापना प्रस्तावित है। इस सचिवालय पुस्तकालय-सह-राज्य सूचना केन्द्र में डिजीटल लाईब्रेरी की स्थापना की जा रही है। यहां मीडिया, शोधार्थियों एवं आम जनों के प्रयोजनार्थ राज्य सरकार के सभी विभागो के प्रकाशनों, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों, महत्वपूर्ण सरकारी नीतियों, संकल्पों इत्यादि को पीडीएफ फारमेट में आनलाईन एवं आफलाईन उपलब्ध रखा जाना है। इसके अतिरिक्त झारखण्ड राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकं, जरनल सहित एक आडियो-वीडियो संग्रह भी उक्त पुस्तकालय-सह-वाचनालय में सुलभ रहेगा। इस हेतु चालू विŸाीय वर्ष में 25.00 लाख रूपये की स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गयी है।
- देश के ख्यातिलब्ध संस्थानों में जनसंचार का अध्ययन करने वाले झारखण्ड राज्य के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना प्रारम्भ की गयी है। विŸाीय वर्ष 2010-11 के दौरान देश के महत्वपूर्ण जनसंचार सस्थानों में अध्ययनरत निम्नाकित विद्यार्थियों को उनके ट्यूशन फीस में सहायता के रूप में छात्रवृति प्रदान की गयी है:-
- वित्तीय वर्ष 2010-11 में हेतु छात्रवृति अन्तर्गत चयनित विद्यार्थियों/संस्थानों एवं राशि की विवरणी:-
- श्री राजेश प्रसाद, हिन्दी पत्रकारिता, 9500.00
- श्री रमेश कुमार, हिन्दी पत्रकारिता, 9500.00
- सुश्री वर्षारानी तिर्की, हिन्दी पत्रकारिता, 19000.00
- श्री विवेक मोहन, विज्ञापन एवं जनसम्पक, 13250.00
- श्री मानु मेहता, अंगे्रजी पत्रकारिता, 9500.00
- श्री प्रवल भारद्वाज, रेडियो एवं टीवी पत्रकारिता, 21000.00
- श्री निरजन कुमार कुजूर निर्देशन एवं पटकथा लेखन, 26625.00
- श्री अनुज कुमार, फिल्म एडीटिंग, द्वितीय सत्र, 8100.00
- जनहित के मुद्दों पर शोध आधारित प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग के द्वारा शोध एवं अन्वेषण की योजना प्रारम्भ की गयी है। इसके लिए विभागीय समिति गठित कर अखबारों में विज्ञापन देकर प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई थी। गठित विभागीय समिति ने कुल 26 आवेदकों का चयन फेलोशिप प्रदान करने हेतु किया है। प्रत्येक फेलोशिप हेतु 50,000 रू॰ की राषि प्रदान की जानी है। इस हेतु पंद्रह लाख रू॰ का प्रावधान किया गया है।
- मीडिया फेलोशिप हेतु चयनित पत्रकार एवं उनका शोध-विषय-
1. अनुपमा कुमारी- पंचायती राज और महिला सशक्तिकरण
2. आलोका- झारखण्ड में मनरेगा का महत्व
3. अनंत - हजारीबाग में लतिका का सामाजिक संघर्ष
4. योगेश्वर राम - पंचायत व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका
5. आशिषी कुमार सिन्हा - बिरहोर समुदाय की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली
6. ओमप्रकाश पाठक - ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य अधिसंरचना
7. रूपक कुमार - झारखंड में जैव-विविधता और जीविकापार्जन
8. सुरेन्द्र लाल सोरेन - कचड़ा चुननेवाले बच्चों के बेहत्तर भविष्य की संभावन
9. सर्वजीत - झारखंड में सूचना का अधिकार
10. प्रशांत जयवर्द्धन - वन प्रबंधन और पारंपरिक नियम
11. नदीम अख्तर - झारखण्ड राज्य में कृषि में तकनीक का इस्तेमाल
12. महेश्वर सिंह छोटु - आदिम जनजाति पहाडि़या कल आज और काल
13. नौशाद आलम - झारखण्ड में समुदायिक वन प्रबंधन की प्रासंगिकता
14. संजय श्रीवास्तव - झारखण्ड के विकास में संसदीय राजनीति का योगदान
15. शैली खत्री - राँची में बच्चों के विकास की स्थिति ।
16. प्रशांत झा - तसर सिल्क उद्योग और इससे जुड़े लोगों की स्थिति
17. कुमार संजय - बच्चों के भोजन और पोषण का अधिकार
18. विकास कुमार सिन्हा - झारखण्ड के पर्यटन स्थलों की स्थिति व विकास।
19. तनवी झा - झारखंड में समुदाय आधरित स्वास्थ्य सेवा
20. अमित कुमार झा - नेशनल गेम्स आयोजन से झारखण्ड में खेल प्रतिभाओं का उदय।
21. चन्दो श्री ठाकुर - राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का सामुदायिक परिदृश्य
22. संजय कृष्ण - ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महिला पलायन का असर
23. सलाउद्दीन- हजारीबाग में एड्स का विस्तार एवं नियंत्रण
24. शैलेश कुमार सिंह - स्वर्णिम झारखंड में नक्सलवाद का अंत
25. पंकज त्रिपाठी - राज्य में बिजली की स्थिति, समस्या और समाधान।
26. शक्तिधर पांडेय - लोक स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में समुदाय की भूमिका।
- उत्कृष्ट योग्यता एवं प्रभाव वाले आलेखों को प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को नगद पुरस्कार की योजना भी प्रारम्भ की गयी है। इसके लिए विज्ञापन प्रकाशित कर प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई है। इस हेतु भी समिति का गठन कर लिया गया है। समिति की बैठकें भी आयोजित हो चुकी है। इस हेतु दस लाख रू॰ का प्रावधान किया गया है।
- सामुदायिक रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से प्रचार प्रसार हेतु सामुदायिक रेडियो केन्द्रों का संस्थापन एवं संचालन कराये जाने की योजना के तहत पचास लाख रू॰ की स्वीकृति दी गई है। इसके प्रथम चरण में राँची विष्वविद्यालय को सामुदायिक रेडियो हेतु बीस लाख रू॰ उपलब्ध कराये जा रहे है। इस हेतु संताल परगना में भी सामुदायिक रेडियो स्टेषन का संस्थापन एवं संचालन के प्रयास किये जा रहे हैं।
- राज्य मुख्यालय राँची में प्रेस क्लब हेतु स्थानीय बूटी रोड में आइएमए भवन के पास राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को भूमि स्थानांतरित कर दी गई है। उक्त भूमि को दी रांची प्रेस क्लब राँची को लीज पर स्थानांतरित करने एवं भवन निर्माण हेतु प्राविधित पचीस लाख रू॰ की धनराशि राँची प्रेस क्लब राँची को उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।
- पारंपरिक संचार माध्यमों, यथा गीत नाट्य के जरिए आम जनता को उनके स्थानीय भाषा में सरकारी कार्यक्रमों से अवगत कराने एवं प्रचार - प्रसार के निमित्त दक्षिणी छोटा नागपुर प्रमण्डल, राँची में 38, उत्तरी छोटानागपुर प्रमण्डल, हजारीबाग में 13 एवं संताल परगना प्रमण्डल, दुमका में 15 निजि सांस्कृतिक दलों का चयन का पैनल निर्माण किया गया है। पलामू प्रमण्डल, एवं कोल्हान प्रमण्डल, में चयन की कार्रवाई की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2010-11 में 1765 गीत नाट्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में कुल 2430 गीत नाट्य कार्यक्रमों के आयोजन का लक्ष्य रखा गया है।
- दुमका से विभागीय पत्रिका ‘‘ होड़ - सोम्बाद ‘‘ का नियमित संताली भाषा में प्रकाशन किया जा रहा है। ‘‘ होड़ - सोम्बाद ‘‘ के पुराने अंको का डीजीटलाईजेशन किया जा रहा है। राँची से प्रकाशित पत्रिका ‘‘ आदिवासी ‘‘ का प्रकाशन भी नये कलेवर में शीघ्र ही किया जाना है। आदिवासी के पुराने अंकों का भी डीजीटलाईजेशन किये जाने की योजना है। इसके अतिरिक्त विभाग के द्वारा ‘‘ झारखण्ड - बढ़ते कदम ‘‘ का नियमित प्रकाशन एवं वितरण किया जा रहा है।
- वित्तीय वर्ष 2010-11 के दौरान कुल 167 मेला एवं प्रदर्शनी विभाग के द्वारा आयोजित की गई जिनके माघ्यम से जिलों में विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों पर प्रचार-प्रसार किया गया।
- चालू वित्तीय वर्ष में मुख्यालय एवं प्रमण्डल स्तर पर मीडिया, जनसंचार, विकास जैसे विषयों पर सेमिनार, सिम्पोजियम एवं वर्कशाप आयोजित करने हेतु पचीस लाख रू॰ की स्वीकृति दी गई है।
- विगत 34 वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान ‘‘ झारखण्ड - दि लैन्ड आफ कलर्स ‘‘ शीर्षक से स्मारिका प्रकाशित की गई एवं झारखण्ड - 75 रिमारकेबल फैक्टस शीर्षक से बुकलैट का प्रकाशन किया गया।
Monday, July 25, 2011
26 पत्रकारों को मीडिया फेलोशिप
चयन समिति में डा॰ रमेश शरण (स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग, रांची विश्वविद्यालय), श्री चंदन मिश्र (ब्यूरो प्रमुख, दैनिक हिन्दुस्तान), डा॰ विष्णु राजगढि़या (ब्यूरो चीफ, नई दुनिया), श्री विजय पाठक (स्थानीय सम्पादक, प्रभात खबर), श्री सुमन श्रीवास्तव (ब्यूरो प्रमुख, दी टेलीग्राफ), श्री अरविन्द मनोज कुमार सिंह (सहायक क्षेत्रीय निदेशक, इग्नू), श्री राजीव लोचन बख्शी (संयुक्त सचिव, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) तथा श्रीमती स्नेहलता एक्का (उप निदेशक, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) शामिल है।
मीडिया फेलोशिप हेतु चयनित पत्रकार एवं उनका शोध-विषय-
1. अनुपमा कुमारी- पंचायती राज और महिला सशक्तिकरण
2. आलोका- झारखण्ड में मनरेगा का महत्व
3. अनंत - हजारीबाग में लतिका का सामाजिक संघर्ष
4. योगेश्वर राम - पंचायत व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका
5. आशिषी कुमार सिन्हा - बिरहोर समुदाय की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली
6. ओमप्रकाश पाठक - ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य अधिसंरचना
7. रूपक कुमार - झारखंड में जैव-विविधता और जीविकापार्जन
8. सुरेन्द्र लाल सोरेन - कचड़ा चुननेवाले बच्चों के बेहत्तर भविष्य की संभावन
9. सर्वजीत - झारखंड में सूचना का अधिकार
10. प्रशांत जयवर्द्धन - वन प्रबंधन और पारंपरिक नियम
11. नदीम अख्तर - झारखण्ड राज्य में कृषि में तकनीक का इस्तेमाल
12. महेश्वर सिंह छोटु - आदिम जनजाति पहाडि़या कल आज और काल
13. नौशाद आलम - झारखण्ड में समुदायिक वन प्रबंधन की प्रासंगिकता
14. संजय श्रीवास्तव - झारखण्ड के विकास में संसदीय राजनीति का योगदान
15. शैली खत्री - राँची में बच्चों के विकास की स्थिति ।
16. प्रशांत झा - तसर सिल्क उद्योग और इससे जुड़े लोगों की स्थिति
17. कुमार संजय - बच्चों के भोजन और पोषण का अधिकार
18. विकास कुमार सिन्हा - झारखण्ड के पर्यटन स्थलों की स्थिति व विकास।
19. तनवी झा - झारखंड में समुदाय आधरित स्वास्थ्य सेवा
20. अमित कुमार झा - नेशनल गेम्स आयोजन से झारखण्ड में खेल प्रतिभाओं का उदय।
21. चन्दो श्री ठाकुर - राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का सामुदायिक परिदृश्य
22. संजय कृष्ण - ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महिला पलायन का असर
23. सलाउद्दीन- हजारीबाग में एड्स का विस्तार एवं नियंत्रण
24. शैलेश कुमार सिंह - स्वर्णिम झारखंड में नक्सलवाद का अंत
25. पंकज त्रिपाठी - राज्य में बिजली की स्थिति, समस्या और समाधान।
26. शक्तिधर पांडेय - लोक स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में समुदाय की भूमिका।
झारखंड मीडिया फेलोशिप
सरकार को पारदर्शी बनाया जाएगा
रांची, 25-07-2011 : झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राज्य में मुंडा सरकार के गठन के बाद अपने तरह के पहले मीडिया से बातचीत में अपनी सरकार की उपलब्धियों और कार्याक्रमों की विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि सरकार को पारदर्शी बनाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कहीं भी किसी प्रकार का भ्रष्टाचार न हो सके. उन्होंने उर्जा बचत के लिए आज यहां राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएफ़एल योजना की घोषणा की और कहा कि राज्य सरकार मीडिया के माध्यम से सभी विकास कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण सोशल ऑडिटिंग कराएगी. ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएफ़एल योजना प्रारंभ करने की घोषणा की. मुंडा ने बताया कि राज्य सरकार इस अभिनव योजना में सीधे सभी पंचायतों को बिजली बल्ब के स्थान पर रोशनी के लिए सीएफ़एल ट्यूब प्रदान करेगी.
इन सीएफ़एल ट्यूबों पर सरकार ग्रामीण पंचायतों को 85 प्रतिशत सब्सिडी देगी. मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार की सभी विकास योजनाओं का खाका मीडिया के माध्यम से जनता के समक्ष रखा जाएगा, जिससे इनका सामाजिक अंकेक्षण हो सकेगा. मुंडा ने दो टूक कहा कि उनकी सरकार सभी विकास कार्यों को जवाबदेही के आधार पर पूरा करने पर जोर दे रही है.
उनकी सरकार मुख्यमंत्री के कार्यों को भी मीडिया के माध्यम से पारदर्शी ढंग से जनता के सामने रखेगी और लोगों के सुझावों का समावेश कर सभी कार्यों को पूरी जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाएगा.उन्होंने कहा कि झारखंड के गठन के बाद राज्य की सरकार और नेतृत्व के प्रति आम लोगों में देश में विश्वसनीयता का संकट रहा है लेकिन उनकी सरकार जनता की विश्वसनीयता की कसौटी पर हर स्तर पर खरा उतरने का प्रयास कर रही है.
Sunday, July 24, 2011
विकासात्मक आलेख हेतु पुरस्कार योजना
प्रविष्टियों के साथ राज्य के विकास से संबंधित अप्रैल - 2010 से लेकर मार्च - 2011 तक प्रकाशित आलेख/छायाप्रति/राष्ट्रीय/राज्य स्तर पर प्रसारित विजुअल्स क्लीपिंग, की सी॰ डी॰ जिनका सत्यापन संबंधित संपादक/ब्यूरोचीफ के द्वारा किया गया हो, संलग्न किया जाना है। आवेदन का प्रारूप विभागीय वेबसाईट http:// www.jharkhand.gov.in http:// 210.212.20.88 पर उपलब्ध है। योजना में राज्य सरकार का निर्णय अंतिम होगा। विस्तृत जानकारी हेतु प्रत्येक कार्यदिवस में श्रीमती स्नेहलता एक्का, संयोजक-सह-उप निदेशक, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, झाखण्ड, राँची (दूरभाष 0651-2281522) से सम्पर्क किया जा सकता हैं।
झारखंड मीडिया फेलोशिप
THEME
The topic chosen should be related to various Development related issues of Jharkhand including distinct culture, social welfare, tribal welfare, issues related to women and children, rural/urban development, industry, employment opportunities, sustainable development in Jharkhand etc.
The Fellowship covers a diverse range of issues in the social development from environment, livelihoods, public health, women and child Welfare, social Welfare, gender issues, human trafficking, Panchayati Raj Institutions, trade and development, traditional local self development, Communication scenario, indigenous Tribal languages, Traditional medicine and its practice, Customary and Traditional laws and their impact on community forest management (CFM) and joint forest management (JFM), Watershed management, Women, livelihood and governance, Conservation as a livelihood, Agricultural from non-cash to cash crops, Livelihood strategies linked to biodiversity of Jharkhand etc.
It may cover a wide range of issues of importance to the common people of Jharkhand, their battle for a better life and development related issues including community health, nutrition, education, social protection, livelihood security, local governance, peace and justice, gender equity, legal rights including right to food, right to information, right to education, consumer rights, forest rights etc.
We welcome proposals that uncover and illustrate topical issues and contemporary debates in any of these fields. The final output must combine research and reportage with background, perspective, analysis, and when appropriate, views and information from experts.
Saturday, July 23, 2011
आर्थिक स्वावलम्बन का आधार है देशज हुनर
26/12/10 - मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि देशज हुनर, विकास, परम्परागत कौशल ही आर्थिक स्वावलम्बन का आधार है। उन्होनंे कहा कि महात्मा गाँधी के ग्राम स्वराज की अवधारणा भी गाँवों की सत्ता, संसाधनों पर लोक स्वामित्व एवं ग्रामीण उद्यमिता के विकास के जरिए सहकारी आधार पर संतुलित विकास पर आधारित है। वे आज स्थानीय मोरहाबादी मैदान में राष्ट्रीय खादी, हस्तशिल्प एवं सरस मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि समेकित ग्रामीण विकास को चुनौती मानकर राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराया है। सूबे की 4423 पंचायतें अपने 53207 जन प्रतिनिधियों के जरिए अपने विकास का माॅडल तय करेंगी एवं ग्राम-स्वराज के सपनों को साकार करेंगी।
पंचायतों के विकास के परंपरागत तकनीक एवं कौशल विकास की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री श्री अर्जून मुण्डा ने कहा कि समेकित रूप से कृषि, बागवानी, पशुपालन एवं जल प्रबंधन की योजनाओं को स्थानीय तौर पर धरातल पर लाने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सक्रिय होना है। बांस, लाह, बेंत, घास, वनौषधि, फल-फूल, मधु, जैविक खेती, हर्बल उत्पादों की दिशा में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ इन परंपरागत कौशलों के मूल्यवर्द्धन एवं वाणिज्यिक प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि इन क्षेत्रों के लिए बेहतर प्रबंधन जरूरी है ताकि बिचैलियों की कोई भूमिका न हो और वैश्विक अर्थव्यवस्था और बाजार का लाभ सीधे परंपरागत शिल्पी/उद्यमी को मिले। उन्होंने कहा कि पंचायत की मौलिक अवधारणा के अनुरूप सरकार परंपरागत हूनरों के विकास सहित गाँव के लोगों को उनके हक-हूकूक दिलाने के लिए संकल्पित है।
उन्होंने कहा कि जल-प्रबंधन आज सबसे बड़ी चुनौती है परंतु सहकारी प्रबंधन के जरिए सरकार और समाज के द्वारा जल समस्या का निदान संभव है।
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि आर्थिक कुप्रबंध और वितरण व्यवस्था की खामियों के कारण कीमतें बढ़ी हैं। राज्य सरकार इस संबंध में तत्पर है। मँहगाई का लाभ किसानों को नहीं मिलता है इसलिए ग्रामीण गरीबी उन्मूलन के लिए केन्द्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों का समेकित प्रयास जरूरी है।
उन्होने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार से लड़ने का संकल्प लिया है और इसके लिए सबों का सहयोग अपेक्षित है। समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल मध्य प्रदेश, श्री रामेश्वर ठाकुर तथा उपमुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन विशिष्ट अतिथि के तौर पर सम्मिलित थे।
ई॰ पेमेंट आफ कोमर्शियल टेक्सेज का प्रारम्भ
27.11.10- विश्वसनीय एवं पारदर्शी सरकार की स्थापना के क्रम में एक कदम आगे बढ़ते हुए झारखण्ड सरकार आज ई॰ पेमेंट आफ कोमर्शियल टेक्सेज का प्रारम्भ हुआ। स्थानीय कैपिटल हिल में ई॰ पेमेंट आफ टेक्सेज का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने कहा की आन लाईन टेक्स पेमेंट की सुविधा प्रदान करते हुए वाणिज्य कर विभाग नें पारदर्शी तरीके से काम करने के अभियान को आगे बढ़ाया है। इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। राज्य सरकार को किसी भी कार्य में समय की बजत के साथ ही विश्वसनियता को भी कायम करनी है। विश्वसनियता सरकार की सफलता की कसौटी है। राजस्व संग्रहण कर हम जनता से राशि प्राप्त कर जनता को ही देते हैं। ऐसे में पारदर्शिता बनाए रखने से जनता का विश्वास प्राप्त होगा और अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। आज आम व्यक्ति समय की कीमत को समझता है। उनका उद्ेष्य है सुविधाओं सहित पारदर्शी तरीके से जीवन को जीना। अतः आॅन लाईन पेमेंट उन्हें सुविधा उपलब्ध कराएगा।उप मुख्यमंत्री तथा वाणिज्य कर विभाग के विभागीय मंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखण्ड द्वारा आधुनिकता विकसित तकनीक को अपनाने का प्रयास किया जा रहा है। ई॰ प्रेक्योरमेन्ट के बाद अगला कदम ई॰पेमेंट आॅफ टैक्सेज है। जिसे झारखण्ड सरकार द्वारा लागू किया गया। उन्होंने कहा कि कागजी कारवाई में समय अधिक लगता रहा है। कम्प्यूटराइजेशन से सभी जनता को इसका फायदा मिलेगा तथा गलतियों की गुंजाइश नही रहेगी। उन्होंने ने कहा कि सरकार समस्याओं को समाप्त करने के लिए कटिबद्ध है।
उप मुख्यमंत्री श्री सुदेश महतो ने कहा कि यह एक शुरूआत है। वाणिज्य कर आंतरिक संसाधन की रीढ़ है। इसका आधुनिकीकरण होगा एक अच्छा संकेत है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री ए॰के॰ सिंह ने कहा कि अब पाँच लाख से अधिक टैक्स राशि जमा करने वाले आॅन लाईन टैक्स जमा कर सकेंगे। सभी प्रकार के प्रपत्रों के कम्प्यूटरीकृत हो जाने से विभाग की दक्षता बढ़ेगी। टैक्स जमाकर्ताओं की सुविधा के लिए विभाग द्वारा और भी कार्य किए जा रहेे हैं। आंतरिक संसाधन का सबसे बड़ा हिस्सा वाणिज्यकर द्वारा ही प्राप्त होता है।
स्टेट बैंक आफ इण्डिया के मुख्य महाप्रबंधक श्री एस॰ के॰ मिश्रा ने कहा कि आज का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण तथा ऐतिहासिक है। ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में झारखण्ड की पहल है। यह राज्य की प्रगति का द्योतक है। सचिव सूचना एवं तकनीक श्री ए॰पी॰ सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा पारदर्शी प्रशासन की स्थापना की दिशा में अगला कदम है। सचिव वाणिज्यकर विभाग श्री अलका तिवारी ने कहा कि कम्प्यूटरीकरण प्रक्रिया को सरल, सुगम बनाता है। एस॰बी॰आई॰ इसका एजेंसी बैंक है। कार्यक्रम का शुभारम्भ माननीय मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। श्री दिनदयाल वर्णवाल तथा श्री कमल सिंघानिया दो व्यापारियों ने आॅनलाईन पेमेंट किया। दोनों को ही मनी रीसिट भी सुलभ कराया गया।
आधार कार्ड से आम जन को मिलेगा लाभ
नियत समय पर प्रोन्नति देने का निर्देश
उन्होंने कहा कि हजारों कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों की प्रोन्नतियाँ कुछ पदाधिकारियों के कारण बाधित नहीं होनी चाहिए। ऐसे पदाधिकारी जिनकी स्वच्छता निगरानी विभाग द्वारा क्लीयर नहीं की जा सकती है, मात्र उनकी सूची प्रत्येक छः माह में निगरानी विभाग द्वारा संबंधित विभाग को प्रेषित की जानी चाहिए और शेष मामलों में कर्मियों की प्रोन्नति लंबित नही रखी जानी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के विरूद्व चार्जशीट दायर हो तो संबंधित विभाग को निश्चित ही सूचना रहनी चाहिए, क्योंकि विभाग के द्वारा अभियोजन स्वीकृति के पष्चात् ही आरोप पत्र तैयार हो सकता है। इस बारे में संबंधित विभाग का उत्तरदायित्व भी निर्धारित रहना चाहिए।
इसी प्रकार कालावधि या रोस्टर क्लीयरेंस के मामलों का तत्काल निष्पादन कार्मिक विभाग के स्तर से किये जाने का निर्देश दिया गया है।
झारखण्ड के विकास पर दिल्ली में विमर्श
मुख्यमंत्री, झारखण्ड, श्री अर्जुन मुण्डा ने इस मौके पर कहा कि आज विकास ही झारखण्ड राज्य की प्रथमतः एवं अन्ततः प्राथमिकता है एवं समेकित विकास के अलावे सरकार का कोई एजेन्डा नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य के आर्थिक विषयों पर अघ्ययन हेतु प्रो० देवराय की अध्यक्षता में गठित कमिटि शीघ्र अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि इस बाबत सरकार प्रयासरत है कि झारखण्ड राज्य के विकास की दर कम से कम 10 प्रतिशत हो एवं राज्य के मानव संसाधन की दक्षता गुणवत्तायुक्त एवं उत्पादनपरक हो।
उन्होंने विमर्श के दौरान चिंता जाहिर किया कि अनियमित वर्षापात और सुखाड़ से झारखण्ड राज्य के लोगों को जूझना पड़ रहा है लेकिन झारखण्डवासी नई चुनी हुई पंचायतों को लेकर खासे उत्साहित है, जहाँ उन्हें विकास की नई किरणों की संभावनाएँ दिख रही है।
उन्होंने सूबे कि विकास हेतु एक साथ ही दीर्घकालिक एवं छोटी अवधि के कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि पारदर्शी व्यवस्था के तहत निविदाएँ आॅनलाईन जारी की जाएँगी। ग्रामीण स्तर तक विकास के आयामों को दुरूस्त करने के साथ-साथ सूचना तकनीक के प्रसार एवं आम लोगों तक उसकी उपलब्धता के प्रयास किए जा रहे है। जन वितरण प्रणाली को गाँव-टोलांें के स्तर तक सुदृढ़ करने का बीड़ा सरकार ने उठाया है। सरकार का यह प्रयास है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लक्षित समूहों तक सुगमतापूर्वक सुलभ हो। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों एवं शहरी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़कों के निर्माण, सबके लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, सिंचाई के साधनों का समुचित विकास एवं कुशल प्रबंधन, सबों को सुरक्षा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य को स्पष्ट प्राथमिकताओं की श्रेणी में रखा है।
इस विमर्श सत्र के दौरान झारखण्ड के उप मुख्यमंत्री श्री सुदेश कुमार महतो एवं श्री हेमंत सोरेन ने भी सबों से झारखण्ड के विकास में सहयोग देने की अपील की।
बेटियों के लिए धन श्री योजना
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने आगामी राज्य स्थापना दिवस (15 नवंबर,2011) से इस योजना की शुरूआत का निदेश देते हुए कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे परिवारों की नवजात बालिका के जन्म से लेकर पाँच साल की उम्र तक हरेक साल बालिका के खाते में सरकार 6000रू जमा करेगी। इसके लिए यह शर्त होगी की बच्ची का जन्म संस्थागत प्रसव से हुआ हो।
इस योजना में सम्मिलित की जाने वालि बी॰पी॰एल परिवारों की लगभग 1,80,740 बालिकाओं को कक्षा 6 में प्रवेश करने पर क्रमशः 2000रू, कक्षा 9 में जाने पर, 4000रू, 11वी में जाने पर 7500रू का एकमुश्त भुकतान उनके बैंक खाते के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावे 11वीं एवं 12वी कक्षा में इसी निधि से प्रतिमाह 200रू की छात्रवृति मिलेगी। बालिका की आयु 21 वर्ष होने तथ 12वीं की परीक्षा देने पर एकमुश्त 1,08,600रू का भुगतान किया जाएगा बशर्ते बालिका का विवाह 18 साल की आयु पूरी करने के बाद हुआ हो।
“धन श्री योजना में गरीबी रेखा के अन्तर्गत वैसे परिवारों की बेटियों को शामिल किया जाना है जिनके माता-पिता ने दो बच्चों के जन्म के बाद परिवार नियोजन अपनाया हो। इस योजना मे 15.11.2010 के बाद जन्मी बेटियों अनाथ बालिकाओं, गोद ली गई बेटियों को शामिल किया जाना है। परंतु बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने पर योजना का लाभ नही मिल सकेगा। पोस्ट आॅफिस के माध्यम से संचालित होने वाली इस योजना पर प्रथम वर्ष राज्य सरकार का अनुमानित 108 करोड़ रू का व्ययभार होगा।इस योजना के अन्तर्गत माता-पिता दोनो की मृत्यु के मामले में परिवार नियोजन की शर्त नहीं होगी। अनाथ/गोद ली गई बालिका को प्रथम बालिका माना जाएगा एवं जुड़वा बच्चियों के मामले में दोंनों बेटियों को लाभ देय होगा।
इस योजना के लिए आँगनबाडि़कर्मी अपने क्षेत्राधीन बी॰पी॰एल परिवार की महिला की प्रसूति का निबंधन कराएगी एवं बेटी के जन्म होने पर अहर्ता प्राप्त मामलों के लिए आवेदन भरवाएँगी। योजना के पारदर्शी कार्यान्वयन हेतु डाक विभाग एवं राज्य सरकार संयुक्त रूप से वेबसाईट पर सभी सूचनाएँ देंगी।
Friday, July 22, 2011
पारदर्शिता के साथ समय पर पूरी हों विकास योजनाएं
उन्होंने कहा कि यदि किसी विभाग की किसी भी योजना के कार्यान्वयन में कोई परेशानी हो तो तत्काल इसे विकास आयुक्त के संज्ञान में लाएँ। उन्होंने कहा कि स्वीकृत योेजना उद्व्यय के अनुसार समानुपातिक रूप से भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति होनी चाहिए। अतएव संबंधित विभागीय पदाधिकारी त्वरित रूप से योजनाओं के कार्यान्वयन को गति प्रदान करें।
उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से कहा कि केन्द्र सरकार के स्तर से यदि किसी योजना का क्लीयरेंस अथवा निधि उपबंध की आवश्यकता हो तो पहले पदाधिकारियों के स्तर से अनौपचारिक रूप संे समन्वय स्थापित करंे ताकि विकास आयुक्त के स्तर से अधिकारियों की टीम बनाकर अनुवर्ती कार्रवाई की जाय एवं सरकार के स्तर से केन्द्र के पास प्रस्ताव दिया जाय। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग अपनी योजनाओं के संबंध में केन्द्र सरकार की योजनाओं एवं विभिन्न राज्यों की समरूप योजना का अध्ययन कर अपनी योजनाओं में नए आयामों के समावेश का प्रस्ताव दे ताकि आगामी पंचवर्षीय योजना में बहुउद्देशीय तत्वों को शामिल किया जा सकंे ।
उप मुख्यमंत्री श्री सुदेश महतो एवं श्री हेमन्त सोरेन ने भी विभागों की प्रगति की समीक्षा की। इस मौके पर विकास आयुक्त श्री देवाशीष गुप्त, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा॰ डी॰ के॰ तिवारी, गृह सचिव जे॰ बी॰ तुबिद, विŸा सचिव श्री सुखदेव सिंह, योजना एवं विकास विभाग श्री अविनाश कुमार, सहित सभी विभागों के प्रधान सचिव/सचिव उपस्थित थे।
हर जरूरतमंद को मिले जनजातीय विकास योजनाओं का लाभ
उन्होंने कहा कि जल जंगल जमीन अर्थात- संपूर्ण अर्थतंत्र और सामाजिक जीवन के समन्वय को ध्यान में रखते हुए पुर्नवास कमजोर वर्गो के सशक्तिकरण, कुपोषण, कुरीतियों के विरूद्व संघर्ष एवं जनजातीय युवाओं के स्वरोजगार से संबंधित जनजातीय उपयोजना के कार्यक्रमों की समीक्षा कर जनजातीय क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर के सुधार का आकलन करना होगा। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में किए जा रहे उद्व्यय, प्राप्त राजस्व एवं बजट को ध्यान में रखते हुए मानव विकास सूचकांक की समीक्षा का निदेश दिया।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील सहभागिता के साथ ठोेस अध्ययन के आधार पर राज्य के जनजातीय क्षेत्रों की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक संरचना के परिप्रेक्ष्य में अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के लिए जनजातीय परामर्शदातृ समिति गठित है। इसलिए हमें सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों तथा वन भूमि में आवासित जनजातीय परिवारों की सुरक्षा और उनके नैसर्गिक अधिकारो की रक्षा के संबंध में निश्चित समय सीमा के भीतर मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जनजातीय मामलों में संबंधित कतिपए न्याय-निर्णयों पर विचार हेतु जनजातीय परामर्शदातृ समिति के अन्तर्गत एक उप समिति बनाई जाएगी जो राज्य के लिए वैधानिक उपबंधो के निर्माण अथवा संशोधन के लिए सरकार को सुझाव देगी। बैठक के दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार, कल्याण, गृह एवं अन्य संबंधित विभागों द्वारा संचालित जनजातीय कल्याण की योजनाओं लक्ष्यों एवं उपलब्ध्यिों को मल्टीमीडया के माध्यम से दर्शाया गया जिस पर समिति के सदस्यों ने सुझाव दिए।
उप मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने भी उपस्थित परामर्शदातृ समिति के माननीय सदस्यों के सुझावों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्री चंपई सोरेन, मंत्री कल्याण विभाग -सह उपाध्यक्ष परामर्शदातृ समिति ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों की योजनाओं के कार्यान्वयन में स्थानीय संस्कृति, परिवेश और सामाजिक मूल्यों का ध्यान रखे जाने की जरूरत है।
उक्त बैठक में झारखण्ड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद के माननीय सदस्य स॰ वि॰ स॰ श्री लोविन हेम्ब्रम, श्री बड़कुँवर गगराई, श्री बंधु तिर्की, श्री नीलकंठ सिंह मुण्डा, श्री चमरा लिंडा, श्रीमती गीताश्री उराँव, श्रीमती सीता सोरेन सहित अन्य माननीय सदस्यगण एवं मुख्य सचिव श्री एस॰ के॰ चैधरी, विकास आयुक्त श्री देवाशीष गुप्त, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा॰ डी॰ के॰ तिवारी, विŸा सचिव श्री सुखदेव सिंह, प्रधान सचिव, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग श्री आदित्य स्वरूप, गृह सचिव जे॰ बी॰ तुबिद सहित सभी विभागों के प्रधान सचिव उपस्थित थे।
हर किसान को मिले कृषि विकास योजना का लाभ
मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुण्डा ने कृषि-विकास के कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रखंडों में खुदरा विक्रेताओं के पास बीज उपलब्ध होने के पहले ही यह जरूरी है कि त्रिस्तरीय पंचायती राय के प्रतिनिधियों, जनसेवक और पंचायत सेवक को इसकी जानकारी हो ताकि इच्छुक किसान मानक गुणवत्ता वाली बीजों का उपयोग कर सकें।
उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों की निगरानी के लिए विभागीय स्तर से एक राज्यस्तरीय दल बनाने का निदेश है जिसके सदस्यों को जिले आवंटित किये गये हैं। वे संबंधित उपायुक्तों के साथ समन्वय कर प्रतिदिन राज्य मुख्यालय को रिपोर्ट देंगे। पारदर्शिता के लिए नई बीज नीति में ही यह प्रावधान किया गया है कि बीज आपूर्तिकत्र्ताओं के द्वारा बीज की पैकिंग के लिए प्रयुक्त बोरों पर स्पष्ट रूप से ’’झारखण्ड सरकार द्वारा अनुदानित बीज ’’ लिखा होना चाहिए। इसके अलावे बीज विक्रेता को अपने सूचना-पट्ट पर सरकार से मिलनेवाली अनुदान राशि तथा प्रभेदवार बीज का मूल्य दर प्रदर्शित करना है।
उन्होंने कहा कि कृषि एवं गन्ना विकास विभाग के द्वारा इस खरीफ मौसम के लिए जिलावार बीज उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इस बार अच्छे मानसून के आसार भी बन रहे हैं। अतएव राज्य के किसान भाईयों से अपील है कि वे सरकार द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे गुणवत्तायुक्त अनुदानित बीज का प्रयोग कर राज्य को खाद्यान्न सुरक्षा के दृष्टिकोण से उन्नत राज्यों में शुमार करें साथ ही बीज वितरण में यदि कोई कठिनाई आये तो तुरन्त संबंधित पदाधिकारियों को इसकी सूचना दें।
Jharkhand Right to Service Bill (English)
(DRAFT BILL)
A Bill to provide for the delivery of services to the people of the State within the stipulated time and for matters connected therewith and incidental thereto.
1. Short title, extent and commencement
(1) This Bill may be called the Jharkhand Rajya Sewa Dene ki Guarantee Vidheyak, 2011.
(2) It shall extend to the whole of Jharkhand.
(3) It shall come into force on such date as the State Government may, by notification in the official Gazette, apoint.
2. Definitions-
In this Bill, unless the context otherwise requires :-
(a) " designated officer" means an authority including one belonging to the local self govt. notified as such for providing the service under Section 3;
(b) "eligible person" mean person who is eligible for notifies service;
(c) "first appeal officer" means an authority including one belonging to the local self govt. who in notified as such under Section 3;
(d) "prescribed" means prescribed by the rules made under this Bill;
(e) "right to service" means right to obtain the service within the stipulated time limit under Section 4;
(f) "service" means any service notified under Section 3;
(g) "second appellate authority" means an authority including one belonging to the local self govt. who is notified as such under Section 3;
(h) "State Government" means the Government of Jharkhand;
(i) "stipulated time" means maximum time to provide the service by the designated officer or to decide the appeal by the first appeal officer as notifies under Section 3;
3. Notification of services, designated officer, first appeal officers, second appellate authority and stipulated time limits.
The State Government may, from time to time, notify the services, designated officers, first appeal officers, second appellate authorities and stipulated time limits, area of the State to which this Bill shall apply.
4. Right to obtain service within stipulated time limit
The designated officer shall provide the service notified, under Section 3 to the person eligible to obtain the service, within the stipulated time limit.
5. Providing services in stipulated time limit
(1) Any application being filed for obtaining services notified under the act will be treated as application under the act. Stipulated time limit, if not explained otherwise in the notification under sec-3 shall start from the date when required application for notified service is submitted to the designated officer or to a person subordinate to him authorized to receive the application, Such application shall be duly acknowledged.
(2) The designated officer on receipt of an application under sub-section (1) shall within the stipulated time limit provide service or reject the application and in case of rejection of application, shall record the reasons in writing and intimate to the applicant.
6. Appeal.
(1) Any person, whose application is rejected under subsection (2) of section 5 or who is not provided the service within the stipulated time limit, may file an appeal to the first appeal officer within thirty days from the date of rejection of application or the expiry of the stipulated time limit.
Provided that the first appeal officer may admit the appeal after the expiry of the period of thirty days if he is satisfied that the appellant was prevented by sufficient cause from filling the appeal in time.
(2) The first appeal officer may order to the designated officer to provide the service within the specified period or may reject the appeal.
(3) A second appeal against decision of first appeal officer shall lie to the second appellate authority within 60 days from the date on which the decision was made:
Provided that the second appellate authority may admit the appeal after the expiry of the period of 60 days if he is satisfied that the appellant was prevented by sufficient cause from filling the appeal in time.
(4) (a) The second appellate authority may order to the designated officer to provide the service within such period as he may specify or may reject the appeal.
(b) Along with the order to provide service, the second appellate authority may impose penalty according to the provisions of section 7.
(5) (a) If the designated officer does not comply sub-section (1) of section 5, then the applicant aggrieved from such noncompliance may submit an application directly to the first appeal officer. This application shall be disposed of in the manner of first appeal.
(b) If the designated officer does not comply the order of providing the service under sub-section (2) of section 6, then the applicant aggrieved from such non-compliance may submit an application directly to second appellate authority. This application shall be disposed of in the manner of second appeal.
(6) The first appeal and second appellate authority shall while deciding an appeal under this section, have the same powers as are vested in civil court while trying a suit under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908) in respect of the following matters, namely :-
(a) requiring the production and inspection of documents;
(b) issuing summons for hearing to the designated officer and appellant; and
(c) any other matter which may be prescribed.
7. Penalty.
(1)(a) Where the second appellate authority is of the opinion that the designated officer has failed to provide service without sufficient and reasonable cause, then he may impose a lump sum penalty which shall not be less than 500 rupees and not more than 5000 rupees.
(b) Where the second appellate authority is of the opinion that the designated officer has caused delay in providing the service, then the may impose a penalty at the rate of 250 rupees per day for such delay on the designated officer, which shall not be more than 5000 rupees.
Provided that the designated officer shall be given a reasonable opportunity of being heard before any penalty is imposed on him.
(2) Where the second appellate authority is of the opinion that the first appeal officer has failed to decide the appeal within the stipulated time limit without any sufficient and reasonable cause, then he may impose a penalty on first appeal officer which shall not be less than 500 rupees and more than 5000 rupees.
Provided that the first appeal officer shall be given a reasonable opportunity of being heard before any penalty is imposed on him.
(3) The second appellate authority may order to give such amount as compensation to the appellant from the penalty imposed under sub-section (1) or (2) or both, as the case may be, which shall not exceed to the imposed penalty.
(4) The second appellate authority, if it is satisfied that the designated officer or the first appeal officer has failed to discharge the duties assigned to him under this Bill, without sufficient and reasonable cause, may recommend disciplinary action against him under the service rules applicable to him.
(5) The penalty so imposed will be in addition to that prescribed in any other act, rules, regulations and notifications already existing.
8. Penalty amount to be deducted from the salary.
The penalty so imposed under 7(1) or 7(2) will be deducted from the salary of the designated officer and the first appeal officer and their concerned subordinate staff in the proportion as decided by the Department having jurisdiction relating to the service. The concerned Departments will issue standing instructions detailing for this purpose the proportion of penalty to be borne by the designated officer and the first appeal officer and their subordinate staff.
9. Revision
The designated officer or first appeal officer aggrieved by any order of second appellate authority in respect of imposing penalty under this Bill, may make an application for revision to the officer nominated by the State Government within the period of 60 days from the date of that order, who shall dispose of the application according to the prescribed procedure:
Provided that the officer nominated by the State Government may entertain the application after the expiry of the said period of 60 days, if it is satisfied that the application could not be submitted in time for the sufficient cause.
10. Constitution of State Public Delivery Service Commission.
The state government may constitute a State Public Service Delivery Commission by notification in an official gazette, having a prescribed composition, and may assign to it functions for achieving the objectives of the act.
11. Power of the State Government to send the applications to Second Appeal Authority directly.
Notwithstanding the other provision of the act, the government, if it gets an application alleging non compliance of the provisions, may send the same directly to the Second Appellate Authority for taking further actions as per the act.
12. Protection of action taken in good faith.
No suit, prosecution or other legal proceeding shall lie against any person for anything which is in good faith done or intended to be done under this Bill or any rule made thereunder.
13. Powers to make rules
(1) The State Government may, by notification in the official Gazette, make rules to carry out the provisions of this Bill.
(2) Every rule made under this Bill by the State Government shall be laid before the State Legislature.
14. Power to remove difficulties
If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Bill, the State Government may by order, not inconsistent with the provisions of this Bill, remove the difficulty:
Provided that no such order shall be made after the expiry of a period of two years from the commencements of this Bill.
Jharkhand Right to Service Bill (Hindi)
राज्य की जनता को नियत समय-सीमा में सेंवाएँ उपलब्ध कराने हेतु और उससे संबंधित
एवं आनुषंगिक मामलों का उपबन्ध करने के लिए एक विधेयक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ ।
(1) यह अधिनियम, ‘झारखण्ड राज्य सेवा देने की गारंटी अधिनियम, 2011‘ कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा।
(3) यह ऐसी तिथि से प्रवृत्त होगा जैसा कि राज्य सरकार, राजकीय गजट में अधिसूचना द्वारा, नियत करें।
2. परिभाषाएँ।
इस अधिनियम में, यदि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:-
‘‘(क) नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी‘‘ से अभिप्रेत है धारा-3 के अधीन सेवा उपलब्ध करने के लिए इस रूप में अधिसूचित कोई प्राधिकार और इनमें स्थानीय स्वायत्त शासन का कोई शामिल है;
(ख) ‘‘ पात्र व्यक्ति‘‘ से अभिप्रेत ऐसे व्यक्ति से है जो अधिसूचित सेवा के लिए पात्र हो;
(ग) ‘‘प्रथम अपीलीय पदाधिकारी‘‘ से अभिप्रेत है कोई प्राधिकार जो धारा-3 के अधीन इस रूप में अधिसूचित किया जाय और इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन का कोई शामिल है;
(घ) ‘‘विहित‘‘ से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनी नियमावली द्वारा विहित;
(ड़)‘‘सेवा का अधिकार‘‘ से अभिप्रेत है धारा-3 के अधीन अधिसूचित कोई सेवा;
(च) ‘‘द्वितीय अपीलीय प्राधिकार‘‘ से अभिप्रेत है कोई प्राधिकार जो धारा-3 के अधीन इस रूप में अधिसूचित किया गया और इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन का कोई शामिल है;
(छ) ‘‘राज्य सरकार‘‘ से अभिप्रेत है झारखण्ड सरकार;
(ज) ‘‘नियत समय-सीमा‘‘ से अभिप्रेत है धारा-3 के अधीन अधिसूचित नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी द्वारा सेवा उपलब्ध कराने या प्रथम अपीलीय पदाधिकारी द्वारा अपील का विनिश्चय करने हेतु अधिकतम समय।
3. नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी, प्रथम अपीलीय पदाधिकारी, द्वितीय अपीलीय प्राधिकार तथा नियम समय सीमा की अधिसूचना।
राज्य सरकार, समय-समय पर सेवाओं, नामनिर्दिष्ट पदाधिकारियों प्रथम अपीलीय पदाधिकारियों, द्वितीय अपीलीय प्राधिकारों तथा नियत समय-सीमाओं राज्य का क्षेत्र जहाँ यह अधिनियम लागू होगा, को अधिसूचित करेगी।
4. नियत समय-सीमा में सेवा प्राप्त करने का अधिकार।
नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी, नियत समय-सीमा में, सेवा प्राप्त करने के लिए पात्र व्यक्ति को धारा-3 के अधीन अधिसूचित सेवा उपलब्ध करायेगा।
5. नियम समय-सीमा में सेवाएँ उपलब्ध कराना।
(1) अधिनियम के अधीन अधिसूचित सेवाओं के लिए समर्पित किये गये किसी आवेदन को अधिनियम के अधीन आवेदन माना जायेगा। नियत समय-सीमा, यदि धारा-3 के अधीन अधिसूचना में अन्यथा स्पष्ट नहीं किया हुआ है तो, उस तिथि से प्रारम्भ होगी जब अधिसूचित सेवा के लिए अपेक्षित आवेदन नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी को या उसके अधीनस्थ आवेदन प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति को समर्पित किया जाय। ऐसे आवेदन की सम्यक रूप से अभिस्वीकृति दी जायेगी।
(2) उपनियम (1) के अधीन आवेदन प्राप्त होने पर नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी नियत समय-सीमा में सेवा उपलब्ध करायेगा या आवेदन अस्वीकृत करेगा और आवेदन की अस्वीकृति की दशा में कारणों को लेखन द्वारा अभिलिखित करेगा और आवेदक को सूचित करेगा।
6. अपील
(1) कोई व्यक्ति, जिसका आवेदन धारा-5 की उपधारा (2) के अधीन अस्वीकृत किया जाता है या जिसे नियत समय-सीमा में सेवा उपलब्ध नहीं की जाती है, आवेदन की अस्वीकृति, की तिथि या नियम समय-सीमा की समाप्ति के तीस दिनों के अन्दर प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के समक्ष अपील दाखिल कर सकेगा:
परन्तु यह कि प्रथम अपीलीय पदाधिकारी तीस दिनों की अवधि की समाप्ति के बाद भी अपील ग्रहण कर सकेगा यदि वह सन्तुष्ट हो कि अपीलकत्र्ता को समय पर अपील दाखिल करने से पर्याप्त कारणों से रोका गया था।
(2) प्रथम अपीलीय पदाधिकारी नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी को विनिर्दिष्ट अवधि में सेवा उपलब्ध कराने के लिए आदेश दे सकेगा या अपील नामंजूर कर सकेगा।
(3) प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के विनिश्चय के विरूद्ध द्वितीय अपील विनिश्चय किये जाने की तिथि से साठ दिनों के अन्दर, द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के समक्ष होगी:
परन्तु यह कि द्वितीय अपीलीय प्राधिकार साठ दिनों की अवधि की समाप्ति के बाद भी अपील ग्रहण कर सकेगा यदि वह सन्तुष्ट हो कि अपीलकत्र्ता को समय पर अपील दाखिल करने से पर्याप्त कारणों से रोका गया था।
(4) (क) द्वितीय अपीलीय प्राधिकार नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी को ऐसी अवधि के अन्दर सेवा उपलब्ध करने का आदेश दे सकेगा जैसा वह विनिर्दिष्ट करे या अपील नामंजूर कर सकेगा।
(ख) सेवा उपलब्ध करने के आदेश के साथ, द्वितीय अपीलीय प्राधिकार, धारा-7 के प्रावधानों के अनुसार दंड अधिरोपित कर सकेगा।
(5) (क) यदि नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी धारा-5 की उपधारा (1) का अनुपालन नहीं करता है तो ऐसे अनुपालन से व्यथित आवेदक प्रथम अपीलीय पदाधिकारी को सीधे आवेदन समर्पित कर सकेगा। इस आवेदन का निष्पादन प्रथम अपील की रीति से किया जायेगा।
(ख) यदि नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी धारा-6 की उपधारा (2) के अधीन सेवा उपलब्ध करने के आदेश का अनुपालन नहीं करता है तो ऐसे अनुपालन से व्यथित आवेदक द्वितीय अपीलीय प्राधिकार को सीधे आवेदन समर्पित कर सकेगा। इस आवेदन का निष्पादन द्वितीय अपील की रीति से किया जायेगा।
(6) इस धारा के अधीन किसी अपील का विनिश्चय करते समय प्रथम अपीलीय पदाधिकारी तथा द्वितीय अपीलीय प्राधिकार को निम्नांकित मामलों में, वही शक्तियाँ होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद के विचारण के समय किसी सिविल कोर्ट को होता है, यथा -
(क) दस्तावेजों की प्रस्तुत करने एवं निरीक्षण की अपेक्षा करने;
(ख) नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी एवं अपीलकत्र्ता को सुनवाई के लिए सम्मन जारी करने; तथा
(ग) कोई अन्य मामला जो विहित किया जाय।
7. दंड।
(1) (क) जहाँ द्वितीय अपीलीय प्राधिकार की राय हो कि नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी बिना पर्याप्त एवं युक्तियुक्त करणों के, सेवा उपलब्ध करने में असफल रहा है, तो वह कोई एकमुश्त दंड अधिरोपित कर सकेगा जो पाँच सौ रूपये से कम नहीं एवं पाँच हजार रूपये से अधिक नहीं होगा।
(ख) जहाँ द्वितीय अपीलीय प्राधिकार की राय हो कि नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी ने सेवा उपलब्ध करने में विलम्ब किया है, तो वह ऐसे विलम्ब के लिए दो सौ पचास रूपये प्रतिदिन की दर से नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी पर दंड अधिरोपित कर सकेगा जो पाँच हजार रूपये से अधिक नहीं होगाः
परन्तु यह कि उसपर कोई दंड अधिरोपित किये जाने के पूर्व नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी को सुनवाई की युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया जायेगा।
(2) जहाँ द्वितीय अपीलीय प्राधिकार की राय हो कि प्रथम अपीलीय पदाधिकारी, बिना किसी पर्याप्त एवं युक्तियुक्त कारणों के, नियत समय-सीमा में अपील का विनिश्चय करने में असफल रहा है, तो वह प्रथम अपीलीय पदाधिकारी पर कोई दंड अधिरोपित कर सकेगा जो पाँच सौ रूपये से कम नहीं तथा पाँच हजार से अधिक नहीं होगा:
परन्तु यह कि उस पर कोई दंड अधिरोपित किये जाने के पूर्व प्रथम अपीलीय पदाधिकारी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया जायेगा।
(3) द्वितीय अपीलीय प्राधिकार यथास्थिति उपधारा (1) या (2) या दोनों, के अधीन अधिरोपित दंड में से अपीलकत्र्ता को ऐसी राशि क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दे सकेगा, जो अधिरोपित दंड से अधिक नहीं होगा।
(4) यदि द्वितीय अपीलीय प्राधिकार सन्तुष्ट हो कि नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी या प्रथम अपीलीय पदाधिकारी इस अधिनियम के अधीन सौंपे गये कत्र्तव्यों का निर्वहन करने में, बिना किसी पर्याप्त एवं युक्तियुक्त कारणों के, असफल रहा हो, तो वह उसके विरूद्ध, उस पर लागू सेवा नियमों के अधीन, अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा कर सकेगा।
(5) अधिरोपित ऐसा दंड पूर्व से अस्तित्व वाले किसी अन्य अधिनियम, नियमावली, विनियमावली एवं अधिसूचनाओं में विहित किये गये के अतिरिक्त होगा।
8. दंड राशि की वेतन से कटौती ।
धारा-7(1) या 7(2) के अधीन अधिरोपित ऐसे दंड की कटौती नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी तथा प्रथम अपीलीय पदाधिकारी एवं उनके संबंधित अधीनस्थ कर्मचारियों के वेतन से, उनकी सेवा संबंधी क्षेत्राधिकार वाले विभाग द्वारा आनुपातिक रूप से की जायेगी। संबंधित विभाग, नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी तथा प्रथम अपीलीय पदाधिकारी एवं उनके अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा धारण किये जाने वाले दंड क अनुपात के विस्तृत विवरण के प्रयोजनार्थ स्थायी अनुदेश जारी करेगा।
9. पुनरीक्षण
इस अधिनियम के अधीन दंड अधिरोपित किये जाने संबंधी द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के किसी आदेश से व्यथित नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी या प्रथम अपीलीय पदाधिकारी, ऐसे आदेश की तिथि से साठ दिनों की अवधि के अन्दर, पुनरीक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा मनोनीत पदाधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकेगा, जो विहित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन का निष्पादन करेगा:
परन्तु यह कि राज्य सरकार द्वारा मनोनीत पदाधिकारी साठ दिनों की अवधि की समाप्ति के बाद भी आवेदन ग्रहण कर सकेगा, यदि वह सन्तुष्ट हो कि पर्याप्त कारणों से आवेदन समय पर समर्पित नहीं किया जा सका।
10. राज्य लोक सेवा परिदान आयोग का गठन।
राज्य सरकार, राज्यकीय गजट में अधिसूचना द्वारा, विहित संरचनायुक्त एक राज्य लोक सेवा परिदान आयोग का गठन करेगी, और उसे इस अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति के लिए कृत्य सौंपेगी।
11. द्वितीय अपीलीय प्राधिकार को सीधे आवेदन भेजने की राज्य सरकार को शक्ति।
अधिनियम के अन्य प्रावधानों के होते हुए भी, यदि राज्य सरकार प्रावधानों के अनुपालन के आरोपों संबंधी आवेदन प्राप्त करती है तो उसे वह सीधे द्वितीय अपीलीय प्राधिकार को, अधिनियम के अनुसार अग्रतर कार्रवाई के लिए भेज सकेगी।
12. सद्भाव में की गयी कार्रवाई का संरक्षण ।
किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध किसी ऐसी चीज के लिए, जिसे इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम के अधीन सद्भाव में किया गया हो, कोई वाद, अभियोजन या अन्य न्यायिक कार्यवाही नहीं की जायेगी।
13. नियमावली बनाने की शक्ति।
(1) राज्य सरकार राजकीय गजट में अधिसूचना द्वारा अधिनियम के प्रावधानों के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए नियमावली बना सकेगी।
(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम राज्य विधान मंडल के समक्ष रखा जायेगा।
14. कठिनाईयाँ दूर करने की शक्ति ।
यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, राजकीय गजट में प्रकाशित आदेश द्वारा, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो, कठिनाई दूर कर सकेगी:
परन्तु यह कि ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के लागू होने से दो वर्षों की समाप्ति के पश्चात नहीं किया जायेगा।
Jharkhand Right to Service Bill (Notice)
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग,
झारखण्ड राज्य सेवा देने की गारंटी विधेयक (Right to Service Bill)
प्रारूप पर सुझाव देने हेतु अनुरोध
राज्य सरकार ‘‘झारखण्ड राज्य सेवा देने की गांरटी विधेयक‘‘ कानून बनाने के लिए कृतसंकल्प है और इससे संबंधित विधेयक को आगामी विधानमंडल सत्र में लाने हेतु प्रयास किया जा रहा है। इस विधेयक के प्रारूप को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखण्ड सरकार के वेबसाईट पर देखा जा सकता है। साथ-ही-साथ इस अधिनियम के अंतर्गत प्रथम चरण में शामिल की जाने वाली प्रस्तावित सेवाओं के लिए निर्धारित समयावधि आदि से सम्बन्धित सूची भी उक्त बेवसाईट पर डाल दी गयी है, आम-जन अपनी प्रतिक्रिया/सुझाव प्रधान सचिव, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखण्ड, राँची के ई-मेल पता sec-pers-jhr@nic.in पर दे सकते है।
2. इस प्रस्तावित विधेयक की मुख्य-मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार है:-
(i) राज्य सरकार समय-समय पर उन सेवाओं को अधिसूचित करेगी, जिसे इस कानून के अंतर्गत लागू करना है। साथ ही नामनिर्दिष्ट पदाधिकारी (Designated Officer), प्रथम अपीलीय पदाधिकारी एवं द्वितीय अपीलीय प्राधिकार तथा सेवाओं को प्रदान करने की निर्धारित समय-सीमा को भी अधिसूचित किया जायगा।
(ii) Designated Officer को निर्धारित समय-सीमा के अंदर सेवाओं को प्रदान करना है और नहीं दिये जाने की स्थिति में कोई भी व्यक्ति प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के यहाँ जा सकता है, जहाँ से Designated Officer को निर्देशित किया जा सकेगा कि आवश्यक सेवा उपलब्ध करायी जाय।
(iii) इसके पश्चात् भी यदि सेवा नहीं प्रदान की जाती है तो द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के कार्यालय में आवेदन दिया जा सकता है, जहाँ से निम्न निर्णय हो सकते है:-
(क) Designated Officer को निर्धारित अवधि के अंदर सेवा उपलब्ध कराने का आदेश दिया जा सकता है।
(ख) Designated Officer एवं अन्य पर दंड लगाया जा सकता है।
(ग) प्रतिदिन देरी के लिए भी 250/- रू0 प्रतिदिन की दर से दंड लगाया जा सकता है, जो अधिकतम 5000/-रू0 की सीमा के अन्तर्गत होगा।
(घ) व्यतिक्रमी पदाधिकारी/कर्मी के विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए भी सक्षम प्राधिकार को अनुशंसा की जा सकती है।
(iv) राज्य सरकार के पास यदि कोई आवेदन आता है जिसमें सेवा निर्धारित समय-सीमा के अंदर नहीं किये जाने की शिकायत हो, तो राज्य सरकार को यह शक्ति होगी कि उस आवेदन को सीधे ही द्वितीय अपीलीय प्राधिकार को इस अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए भेज दे।
(v) सार्वजनिक रूप से उक्त विधेयक के सम्बन्ध में आमजनों को अवगत कराने हेतु विधेयक का प्रारूप सभी उपायुक्तों/अनुमण्डल पदाधिकारियों को सूचना पट पर प्रकाशन हेतु प्रेषित किया जा रहा है। आम-जन विधेयक के संबंध में सुझाव या प्रतिक्रिया संबंधित जिला के उपायुक्त/ अनुमण्डल कार्यालय में दे सकते हैं।
3. विधेयक के संबंध में अपनेे सुझाव/प्रतिक्रिया ई-मेल sec-pers-jhr@nic.in के माध्यम से अथवा निम्न पते पर भी भेजे जा सकते है। आशा है कि आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया/सुझाव सूचना प्रकाशन के 10 दिन के भीतर प्राप्त होंगे जो इस विधेयक प्रारूप को और अधिक परिष्कृत एवं प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।
(आदित्य स्वरूप) प्रधान सचिव, कार्मिक, प्र0सु0 तथा राजभाषा विभाग।
ज्ञापांक-2/विविध-11-13/2011 का॰ 3805/ राँची, दिनांक 08 जुलाई, 2011
सरकार का उद्देश्य है एक पारदर्शी व गतिशील प्रशासन व्यवस्था देना
झारखंड मंत्रिमंडल के साथियों के नाम एक संदेशइस वित्तीय वर्ष की लगभग आधी अवधि बीत जाने के उपरान्त एक नई लोकप्रिय सरकार का गठन झारखंड राज्य में हुआ है। जब हम लोगों ने सरकार संभाली है, तब तक राज्य योजना के कुल वार्षिक लक्ष्य रूपए 9240 करोड़ के विरुद्ध मात्र लगभग 2500 करोड़ रूपए ही व्यय हो सके हैं, जो कुल लक्ष्य का 27 प्रतिशत है ।
मेरे द्वारा की गई सभी विभागों की समीक्षात्मक बैठक में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि केन्द्र सरकार की सहायता से संचालित फ्लैगशिप योजनाओं में इस वित्तीय वर्ष के प्रथम दिन लगभग 2000 करोड़ रूपए की राशि अव्यवहृत पायी गयी, जिसका नुकसान निश्चित रूप से इस राज्य को हुआ है । इस वित्तीय वर्ष में भी इन योजनाओं के कुल लक्ष्य लगभग 10700 करोड़ रूपए के विरुद्ध अभी तक मात्र 2500 करोड़ का व्यय किया गया है ।
स्पष्ट है कि आम जनता के कल्याण हेतु चालू इन योजनाओं की प्रगति संतोषजनक नहीं है । इस सरकार से जनता की बहुत-सी आशाएं हैं, जिन पर खरा उतरने हेतु हम दृढ़संकल्पित हैं। आवश्यकता है कि सही दिशा में राज्य के विकास हेतु ठोस कदम उठाए जाएं। इस बारे में मेरे कुछ सुझाव हैं जिन पर आप अपने विभागीय पदाधिकारियों के साथ विमर्श करते हुए अमल करना चाहेंगेः-
1. इस सरकार का उद्देश्य एक पारदर्शी व गतिशील प्रशासन व्यवस्था देना है । सरकार के अधीन सभी व्यक्तियों की सोच परिणामोन्मुखी होनी चाहिए । विभागीय मंत्री प्रत्येक माह में निर्धारित लक्ष्यों की समीक्षा करें व देखें कि लक्ष्य के अनुरूप कितनी प्रगति की जा रही है।
2. राज्य सरकार के द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रारम्भ किये गये अभियान को कड़ाई से जारी रखना है। प्रशासनिक तथा कानूनी कार्रवाई को अधिक समय तक लंबित न रखकर तीन माह में निश्चित निर्णय तक पहुंचना होगा। ऐसा करते समय यह ध्यान में रखना होगा कि ईमानदार, योग्य व दक्ष पदाधिकारीगण को कतिपय ‘‘बोनाफाईड’’ गलतियों के कारण परेशान न किया जाए।
3. प्रशासनिक शिथिलता के पीछे क्या कारण है, इन्हें चिन्ह्ति किया जाय। पूर्ण प्रशासनिक तंत्र को ऊर्जावान करना होगा। यह तभी संभव होगा, जब प्रत्येक स्तर के प्रशासनिक पदाधिकारियों का सम्यक उपयोग किया जाये। सचिवालय का कार्य नीति-निर्धारण करना है। योजनाओं का कार्यान्वयन व पर्यवेक्षण मुख्यतः निदेशालय व क्षेत्रीय कार्यालयों की जिम्मेदारी है। निदेशालयों को सुदृढ़ बनाया जाये। शक्तियों के आवश्यक प्रत्यायोजन किये जायें। स्थापना संबंधी मामलों में भी अनावश्यक केन्द्रीकरण न किया जाये।
4. नियमों, उप-नियमों, परिपत्रों व शक्तियों के प्रत्यायोजन आदि के कारण आने वाली प्रक्रियात्मक बाधाओं की पहचान की जाय तथा उन्हें मेरे संज्ञान में लाया जाय। जहां पदाधिकारियों व वाहनों की कमी भी काम में बाधक हो रही है, इसे यथाशीघ्र दूर करने का प्रयास किया जाये । इस प्रयोजन हेतु विभाग के सभी स्तरों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों से विमर्श किया जाये। मैं मुख्य सचिव को तद्नुसार निदेशित कर रहा हूं।
5. राज्य के सीमित संसाधनों पर गैर-योजना व्यय का बहुत अधिक बोझ है, जो कालान्तर में बढ़ता ही जायेगा। इस संदर्भ में केन्द्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि का पूर्ण उपयोग किया जाना अपरिहार्य है। उक्त योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जाये। केन्द्र सरकार के संबंधित मंत्री से औपचारिक व अनौपचारिक संपर्क बनाये रखा जाये। केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों की वेबसाईट को नियमित रूप से देखा जाये, ताकि योजनाओं के संबंध में अद्यतन सूचना उपलब्ध हो सके। अपने विभाग की वेबसाईट बनायें जिसे नियमित रूप से अद्यतन भी किया जाये।
6. प्रत्येक विभाग तीन से पंाच सर्वाधिक महत्वपूर्ण जनहित की योजनाओं का चयन करे। इन योजनाओं की गहन समीक्षा आप के व विभागीय सचिव/प्रधान सचिव के स्तर पर की जाये। मैं स्वयं भी इन्हीं योजनाओं की समीक्षा विशेष रूप से करना चाहूंगा। सरकार का फोकस स्पष्ट होना चाहिए।
7. सूचना तकनीक का यथासंभव प्रशासनिक सुगमता व पारदर्शिता हेतु उपयोग किया जाये। मैंने पूर्व में ही निर्देश दिये है कि संचिकाओं का परिचालन फाइल ट्रेकर के माध्यम से हो। साथ ही सभी विभागों में निविदा की प्रक्रिया ई-टेण्डर के द्वारा हो। विभाग में कार्यरत विभिन्न स्तर के पदाधिकारी व कर्मचारीगण को कम्प्यूटर में प्रशिक्षण लेकर दक्षता प्राप्त करनी चाहिये तथा उके कार्यों का मूल्यांकन इस बारे में भी होना चाहिये। आपसे अनुरोध होगा कि इसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाये।
8. सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना जरूरी है। सभी विभागों के लिए प्रत्येक माह एक तिथि निर्धारित की जा रही है। उस दिन आप और विभागीय सचिव प्रेस व इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ वार्ता करके सरकार के कार्यक्रमों की जानकारी दे तथा उनसे भी सरकार के कार्यों के संबंध में ‘‘फीडबैक‘‘ प्राप्त करें।
9. इस वित्तीय वर्ष हेतु यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना मद की पूरी राशि का स्वीकृत्यादेश दिनांक 25.11.2010 तक एवं सारे आवंटनादेश 30.11.2010 तक निश्चित रूप से निर्गत कर दिये जायें। जिन योजनाओं पर मंत्रिपरिषद् के अनुमोदन की आवश्यकता है, उनका प्रस्ताव 22.11.2010 तक मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग को भेज दिया जाय। इस वर्ष की योजना की विवरणी योजनावार आप व विभागीय सचिव सदैव अपने साथ रखें और प्रतिदिन देखें कि किस मद में स्वीकृत्यादेश हेतु कार्रवाई नहीं की गई है।
10. केन्द्र सरकार के द्वारा संपोषित अथवा केंद्रीय सहायता पर आधारित योजनाओं के संबंध में व्यय-विवरणी एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र 25.11.2010 तक भेज दिया जाये और जो राशि विमुक्त नहीं हुई है, उसे प्राप्त करने का प्रयास किया जाये। इस बारे में केन्द्र सरकार के मंत्रीगण एवं शीर्षस्थ पदाधिकारियों के साथ लगातार वात्र्ता की जानी चाहिए।
11. दिसम्बर माह में आपके तथा विभागीय सचिव एवं विभागाध्यक्षों के द्वारा कार्यक्रम बनाकर सघन रूप से राज्य के विभिन्न जिलों का भ्रमण किया जाये, जिससे योजनाओं की जानकारी धरातल पर प्राप्त की जा सके और कार्य गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सके।
12. अगले वित्तीय वर्ष हेतु राज्य योजना की तैयारी के लिए आप विभागीय पदाधिकारीगण व संबंधित आम जन से विमर्श करें। आधारभूत संरचनाओं के विकास के दृष्टिकोण से तथा जन-भावनाओं के अनुरूप योजनाओं का सूत्रण किया जाना चाहिये; रूटीन तरीके से योजनाओं को तैयार करना उपयोगी नहीं रहेगा। ऐसी योजनायें ली जायें जिनसे आम जनता को तत्काल लाभ पहुंचे। इस बात पर भी विचार किया जाय कि आपके विभाग से आवश्यक आर्थिक संसाधन कैसे जुटाये जा सकते हैं तथा किन-किन क्षेत्रों में पब्लिक प्राइबेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी माॅडल पर योजनाओं को कार्यान्वित किया जा सकता है।
हम सभी का कत्र्तव्य है कि इस राज्य के सफल घरेलू उत्पाद की वृद्धि हेतु आवश्यक विकासात्मक कार्य करते हुए मानव विकास सूचकांक को उच्च स्तर पर लाया जाय। हमें झारखंड राज्य को न ही सिर्फ विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है, अपितु यह सुनिश्चित करना है कि इस राज्य की सोच व छवि बदले और देश यह देखे की झारखंड सही दिशा में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है।
आपका
अर्जुन मुण्डा
प्रति, सभी मंत्रीगण।



