झारखंड मंत्रिमंडल के साथियों के नाम एक संदेशअर्जुन मुण्डा, मुख्यमंत्री
प्रिय साथियो,
इस वित्तीय वर्ष की लगभग आधी अवधि बीत जाने के उपरान्त एक नई लोकप्रिय सरकार का गठन झारखंड राज्य में हुआ है। जब हम लोगों ने सरकार संभाली है, तब तक राज्य योजना के कुल वार्षिक लक्ष्य रूपए 9240 करोड़ के विरुद्ध मात्र लगभग 2500 करोड़ रूपए ही व्यय हो सके हैं, जो कुल लक्ष्य का 27 प्रतिशत है ।
मेरे द्वारा की गई सभी विभागों की समीक्षात्मक बैठक में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि केन्द्र सरकार की सहायता से संचालित फ्लैगशिप योजनाओं में इस वित्तीय वर्ष के प्रथम दिन लगभग 2000 करोड़ रूपए की राशि अव्यवहृत पायी गयी, जिसका नुकसान निश्चित रूप से इस राज्य को हुआ है । इस वित्तीय वर्ष में भी इन योजनाओं के कुल लक्ष्य लगभग 10700 करोड़ रूपए के विरुद्ध अभी तक मात्र 2500 करोड़ का व्यय किया गया है ।
स्पष्ट है कि आम जनता के कल्याण हेतु चालू इन योजनाओं की प्रगति संतोषजनक नहीं है । इस सरकार से जनता की बहुत-सी आशाएं हैं, जिन पर खरा उतरने हेतु हम दृढ़संकल्पित हैं। आवश्यकता है कि सही दिशा में राज्य के विकास हेतु ठोस कदम उठाए जाएं। इस बारे में मेरे कुछ सुझाव हैं जिन पर आप अपने विभागीय पदाधिकारियों के साथ विमर्श करते हुए अमल करना चाहेंगेः-
1. इस सरकार का उद्देश्य एक पारदर्शी व गतिशील प्रशासन व्यवस्था देना है । सरकार के अधीन सभी व्यक्तियों की सोच परिणामोन्मुखी होनी चाहिए । विभागीय मंत्री प्रत्येक माह में निर्धारित लक्ष्यों की समीक्षा करें व देखें कि लक्ष्य के अनुरूप कितनी प्रगति की जा रही है।
2. राज्य सरकार के द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रारम्भ किये गये अभियान को कड़ाई से जारी रखना है। प्रशासनिक तथा कानूनी कार्रवाई को अधिक समय तक लंबित न रखकर तीन माह में निश्चित निर्णय तक पहुंचना होगा। ऐसा करते समय यह ध्यान में रखना होगा कि ईमानदार, योग्य व दक्ष पदाधिकारीगण को कतिपय ‘‘बोनाफाईड’’ गलतियों के कारण परेशान न किया जाए।
3. प्रशासनिक शिथिलता के पीछे क्या कारण है, इन्हें चिन्ह्ति किया जाय। पूर्ण प्रशासनिक तंत्र को ऊर्जावान करना होगा। यह तभी संभव होगा, जब प्रत्येक स्तर के प्रशासनिक पदाधिकारियों का सम्यक उपयोग किया जाये। सचिवालय का कार्य नीति-निर्धारण करना है। योजनाओं का कार्यान्वयन व पर्यवेक्षण मुख्यतः निदेशालय व क्षेत्रीय कार्यालयों की जिम्मेदारी है। निदेशालयों को सुदृढ़ बनाया जाये। शक्तियों के आवश्यक प्रत्यायोजन किये जायें। स्थापना संबंधी मामलों में भी अनावश्यक केन्द्रीकरण न किया जाये।
4. नियमों, उप-नियमों, परिपत्रों व शक्तियों के प्रत्यायोजन आदि के कारण आने वाली प्रक्रियात्मक बाधाओं की पहचान की जाय तथा उन्हें मेरे संज्ञान में लाया जाय। जहां पदाधिकारियों व वाहनों की कमी भी काम में बाधक हो रही है, इसे यथाशीघ्र दूर करने का प्रयास किया जाये । इस प्रयोजन हेतु विभाग के सभी स्तरों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों से विमर्श किया जाये। मैं मुख्य सचिव को तद्नुसार निदेशित कर रहा हूं।
5. राज्य के सीमित संसाधनों पर गैर-योजना व्यय का बहुत अधिक बोझ है, जो कालान्तर में बढ़ता ही जायेगा। इस संदर्भ में केन्द्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि का पूर्ण उपयोग किया जाना अपरिहार्य है। उक्त योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जाये। केन्द्र सरकार के संबंधित मंत्री से औपचारिक व अनौपचारिक संपर्क बनाये रखा जाये। केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों की वेबसाईट को नियमित रूप से देखा जाये, ताकि योजनाओं के संबंध में अद्यतन सूचना उपलब्ध हो सके। अपने विभाग की वेबसाईट बनायें जिसे नियमित रूप से अद्यतन भी किया जाये।
6. प्रत्येक विभाग तीन से पंाच सर्वाधिक महत्वपूर्ण जनहित की योजनाओं का चयन करे। इन योजनाओं की गहन समीक्षा आप के व विभागीय सचिव/प्रधान सचिव के स्तर पर की जाये। मैं स्वयं भी इन्हीं योजनाओं की समीक्षा विशेष रूप से करना चाहूंगा। सरकार का फोकस स्पष्ट होना चाहिए।
7. सूचना तकनीक का यथासंभव प्रशासनिक सुगमता व पारदर्शिता हेतु उपयोग किया जाये। मैंने पूर्व में ही निर्देश दिये है कि संचिकाओं का परिचालन फाइल ट्रेकर के माध्यम से हो। साथ ही सभी विभागों में निविदा की प्रक्रिया ई-टेण्डर के द्वारा हो। विभाग में कार्यरत विभिन्न स्तर के पदाधिकारी व कर्मचारीगण को कम्प्यूटर में प्रशिक्षण लेकर दक्षता प्राप्त करनी चाहिये तथा उके कार्यों का मूल्यांकन इस बारे में भी होना चाहिये। आपसे अनुरोध होगा कि इसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाये।
8. सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना जरूरी है। सभी विभागों के लिए प्रत्येक माह एक तिथि निर्धारित की जा रही है। उस दिन आप और विभागीय सचिव प्रेस व इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ वार्ता करके सरकार के कार्यक्रमों की जानकारी दे तथा उनसे भी सरकार के कार्यों के संबंध में ‘‘फीडबैक‘‘ प्राप्त करें।
9. इस वित्तीय वर्ष हेतु यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना मद की पूरी राशि का स्वीकृत्यादेश दिनांक 25.11.2010 तक एवं सारे आवंटनादेश 30.11.2010 तक निश्चित रूप से निर्गत कर दिये जायें। जिन योजनाओं पर मंत्रिपरिषद् के अनुमोदन की आवश्यकता है, उनका प्रस्ताव 22.11.2010 तक मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग को भेज दिया जाय। इस वर्ष की योजना की विवरणी योजनावार आप व विभागीय सचिव सदैव अपने साथ रखें और प्रतिदिन देखें कि किस मद में स्वीकृत्यादेश हेतु कार्रवाई नहीं की गई है।
10. केन्द्र सरकार के द्वारा संपोषित अथवा केंद्रीय सहायता पर आधारित योजनाओं के संबंध में व्यय-विवरणी एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र 25.11.2010 तक भेज दिया जाये और जो राशि विमुक्त नहीं हुई है, उसे प्राप्त करने का प्रयास किया जाये। इस बारे में केन्द्र सरकार के मंत्रीगण एवं शीर्षस्थ पदाधिकारियों के साथ लगातार वात्र्ता की जानी चाहिए।
11. दिसम्बर माह में आपके तथा विभागीय सचिव एवं विभागाध्यक्षों के द्वारा कार्यक्रम बनाकर सघन रूप से राज्य के विभिन्न जिलों का भ्रमण किया जाये, जिससे योजनाओं की जानकारी धरातल पर प्राप्त की जा सके और कार्य गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सके।
12. अगले वित्तीय वर्ष हेतु राज्य योजना की तैयारी के लिए आप विभागीय पदाधिकारीगण व संबंधित आम जन से विमर्श करें। आधारभूत संरचनाओं के विकास के दृष्टिकोण से तथा जन-भावनाओं के अनुरूप योजनाओं का सूत्रण किया जाना चाहिये; रूटीन तरीके से योजनाओं को तैयार करना उपयोगी नहीं रहेगा। ऐसी योजनायें ली जायें जिनसे आम जनता को तत्काल लाभ पहुंचे। इस बात पर भी विचार किया जाय कि आपके विभाग से आवश्यक आर्थिक संसाधन कैसे जुटाये जा सकते हैं तथा किन-किन क्षेत्रों में पब्लिक प्राइबेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी माॅडल पर योजनाओं को कार्यान्वित किया जा सकता है।
हम सभी का कत्र्तव्य है कि इस राज्य के सफल घरेलू उत्पाद की वृद्धि हेतु आवश्यक विकासात्मक कार्य करते हुए मानव विकास सूचकांक को उच्च स्तर पर लाया जाय। हमें झारखंड राज्य को न ही सिर्फ विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है, अपितु यह सुनिश्चित करना है कि इस राज्य की सोच व छवि बदले और देश यह देखे की झारखंड सही दिशा में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है।
प्रति, सभी मंत्रीगण।
इस वित्तीय वर्ष की लगभग आधी अवधि बीत जाने के उपरान्त एक नई लोकप्रिय सरकार का गठन झारखंड राज्य में हुआ है। जब हम लोगों ने सरकार संभाली है, तब तक राज्य योजना के कुल वार्षिक लक्ष्य रूपए 9240 करोड़ के विरुद्ध मात्र लगभग 2500 करोड़ रूपए ही व्यय हो सके हैं, जो कुल लक्ष्य का 27 प्रतिशत है ।
मेरे द्वारा की गई सभी विभागों की समीक्षात्मक बैठक में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि केन्द्र सरकार की सहायता से संचालित फ्लैगशिप योजनाओं में इस वित्तीय वर्ष के प्रथम दिन लगभग 2000 करोड़ रूपए की राशि अव्यवहृत पायी गयी, जिसका नुकसान निश्चित रूप से इस राज्य को हुआ है । इस वित्तीय वर्ष में भी इन योजनाओं के कुल लक्ष्य लगभग 10700 करोड़ रूपए के विरुद्ध अभी तक मात्र 2500 करोड़ का व्यय किया गया है ।
स्पष्ट है कि आम जनता के कल्याण हेतु चालू इन योजनाओं की प्रगति संतोषजनक नहीं है । इस सरकार से जनता की बहुत-सी आशाएं हैं, जिन पर खरा उतरने हेतु हम दृढ़संकल्पित हैं। आवश्यकता है कि सही दिशा में राज्य के विकास हेतु ठोस कदम उठाए जाएं। इस बारे में मेरे कुछ सुझाव हैं जिन पर आप अपने विभागीय पदाधिकारियों के साथ विमर्श करते हुए अमल करना चाहेंगेः-
1. इस सरकार का उद्देश्य एक पारदर्शी व गतिशील प्रशासन व्यवस्था देना है । सरकार के अधीन सभी व्यक्तियों की सोच परिणामोन्मुखी होनी चाहिए । विभागीय मंत्री प्रत्येक माह में निर्धारित लक्ष्यों की समीक्षा करें व देखें कि लक्ष्य के अनुरूप कितनी प्रगति की जा रही है।
2. राज्य सरकार के द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रारम्भ किये गये अभियान को कड़ाई से जारी रखना है। प्रशासनिक तथा कानूनी कार्रवाई को अधिक समय तक लंबित न रखकर तीन माह में निश्चित निर्णय तक पहुंचना होगा। ऐसा करते समय यह ध्यान में रखना होगा कि ईमानदार, योग्य व दक्ष पदाधिकारीगण को कतिपय ‘‘बोनाफाईड’’ गलतियों के कारण परेशान न किया जाए।
3. प्रशासनिक शिथिलता के पीछे क्या कारण है, इन्हें चिन्ह्ति किया जाय। पूर्ण प्रशासनिक तंत्र को ऊर्जावान करना होगा। यह तभी संभव होगा, जब प्रत्येक स्तर के प्रशासनिक पदाधिकारियों का सम्यक उपयोग किया जाये। सचिवालय का कार्य नीति-निर्धारण करना है। योजनाओं का कार्यान्वयन व पर्यवेक्षण मुख्यतः निदेशालय व क्षेत्रीय कार्यालयों की जिम्मेदारी है। निदेशालयों को सुदृढ़ बनाया जाये। शक्तियों के आवश्यक प्रत्यायोजन किये जायें। स्थापना संबंधी मामलों में भी अनावश्यक केन्द्रीकरण न किया जाये।
4. नियमों, उप-नियमों, परिपत्रों व शक्तियों के प्रत्यायोजन आदि के कारण आने वाली प्रक्रियात्मक बाधाओं की पहचान की जाय तथा उन्हें मेरे संज्ञान में लाया जाय। जहां पदाधिकारियों व वाहनों की कमी भी काम में बाधक हो रही है, इसे यथाशीघ्र दूर करने का प्रयास किया जाये । इस प्रयोजन हेतु विभाग के सभी स्तरों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों से विमर्श किया जाये। मैं मुख्य सचिव को तद्नुसार निदेशित कर रहा हूं।
5. राज्य के सीमित संसाधनों पर गैर-योजना व्यय का बहुत अधिक बोझ है, जो कालान्तर में बढ़ता ही जायेगा। इस संदर्भ में केन्द्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि का पूर्ण उपयोग किया जाना अपरिहार्य है। उक्त योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जाये। केन्द्र सरकार के संबंधित मंत्री से औपचारिक व अनौपचारिक संपर्क बनाये रखा जाये। केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों की वेबसाईट को नियमित रूप से देखा जाये, ताकि योजनाओं के संबंध में अद्यतन सूचना उपलब्ध हो सके। अपने विभाग की वेबसाईट बनायें जिसे नियमित रूप से अद्यतन भी किया जाये।
6. प्रत्येक विभाग तीन से पंाच सर्वाधिक महत्वपूर्ण जनहित की योजनाओं का चयन करे। इन योजनाओं की गहन समीक्षा आप के व विभागीय सचिव/प्रधान सचिव के स्तर पर की जाये। मैं स्वयं भी इन्हीं योजनाओं की समीक्षा विशेष रूप से करना चाहूंगा। सरकार का फोकस स्पष्ट होना चाहिए।
7. सूचना तकनीक का यथासंभव प्रशासनिक सुगमता व पारदर्शिता हेतु उपयोग किया जाये। मैंने पूर्व में ही निर्देश दिये है कि संचिकाओं का परिचालन फाइल ट्रेकर के माध्यम से हो। साथ ही सभी विभागों में निविदा की प्रक्रिया ई-टेण्डर के द्वारा हो। विभाग में कार्यरत विभिन्न स्तर के पदाधिकारी व कर्मचारीगण को कम्प्यूटर में प्रशिक्षण लेकर दक्षता प्राप्त करनी चाहिये तथा उके कार्यों का मूल्यांकन इस बारे में भी होना चाहिये। आपसे अनुरोध होगा कि इसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाये।
8. सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना जरूरी है। सभी विभागों के लिए प्रत्येक माह एक तिथि निर्धारित की जा रही है। उस दिन आप और विभागीय सचिव प्रेस व इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ वार्ता करके सरकार के कार्यक्रमों की जानकारी दे तथा उनसे भी सरकार के कार्यों के संबंध में ‘‘फीडबैक‘‘ प्राप्त करें।
9. इस वित्तीय वर्ष हेतु यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना मद की पूरी राशि का स्वीकृत्यादेश दिनांक 25.11.2010 तक एवं सारे आवंटनादेश 30.11.2010 तक निश्चित रूप से निर्गत कर दिये जायें। जिन योजनाओं पर मंत्रिपरिषद् के अनुमोदन की आवश्यकता है, उनका प्रस्ताव 22.11.2010 तक मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग को भेज दिया जाय। इस वर्ष की योजना की विवरणी योजनावार आप व विभागीय सचिव सदैव अपने साथ रखें और प्रतिदिन देखें कि किस मद में स्वीकृत्यादेश हेतु कार्रवाई नहीं की गई है।
10. केन्द्र सरकार के द्वारा संपोषित अथवा केंद्रीय सहायता पर आधारित योजनाओं के संबंध में व्यय-विवरणी एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र 25.11.2010 तक भेज दिया जाये और जो राशि विमुक्त नहीं हुई है, उसे प्राप्त करने का प्रयास किया जाये। इस बारे में केन्द्र सरकार के मंत्रीगण एवं शीर्षस्थ पदाधिकारियों के साथ लगातार वात्र्ता की जानी चाहिए।
11. दिसम्बर माह में आपके तथा विभागीय सचिव एवं विभागाध्यक्षों के द्वारा कार्यक्रम बनाकर सघन रूप से राज्य के विभिन्न जिलों का भ्रमण किया जाये, जिससे योजनाओं की जानकारी धरातल पर प्राप्त की जा सके और कार्य गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सके।
12. अगले वित्तीय वर्ष हेतु राज्य योजना की तैयारी के लिए आप विभागीय पदाधिकारीगण व संबंधित आम जन से विमर्श करें। आधारभूत संरचनाओं के विकास के दृष्टिकोण से तथा जन-भावनाओं के अनुरूप योजनाओं का सूत्रण किया जाना चाहिये; रूटीन तरीके से योजनाओं को तैयार करना उपयोगी नहीं रहेगा। ऐसी योजनायें ली जायें जिनसे आम जनता को तत्काल लाभ पहुंचे। इस बात पर भी विचार किया जाय कि आपके विभाग से आवश्यक आर्थिक संसाधन कैसे जुटाये जा सकते हैं तथा किन-किन क्षेत्रों में पब्लिक प्राइबेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी माॅडल पर योजनाओं को कार्यान्वित किया जा सकता है।
हम सभी का कत्र्तव्य है कि इस राज्य के सफल घरेलू उत्पाद की वृद्धि हेतु आवश्यक विकासात्मक कार्य करते हुए मानव विकास सूचकांक को उच्च स्तर पर लाया जाय। हमें झारखंड राज्य को न ही सिर्फ विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है, अपितु यह सुनिश्चित करना है कि इस राज्य की सोच व छवि बदले और देश यह देखे की झारखंड सही दिशा में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है।
शुभकामनाओं सहित।
आपका
अर्जुन मुण्डा
आपका
अर्जुन मुण्डा
प्रति, सभी मंत्रीगण।
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